ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् ने कराया 31 ब्राह्मण बटुकों का उपनयन संस्कार.
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी।
छ.ग.प्रदेश - उत्कृष्ट ब्राह्मण सामाजिक संगठन समग्र ब्राह्मण परिषद् छत्तीसगढ़ की बिलासपुर मातृशक्ति परिषद् ईकाई द्वारा गुरुवार को महामाया देवी की नगरी रतनपुर में मंदिर परिसर के श्री सत्संग मंडप में 31 ब्राह्मण बटुकों का सामूहिक उपनयन संस्कार कराया गया.
समग्र ब्राह्मण मातृशक्ति परिषद् बिलासपुर की जिलाध्यक्ष श्रीमती रमा दीवान एवं जिला सचिव श्रीमती अंजू शर्मा ने आयोजन के विषय में जानकारी प्रदान करते हुए बताया कि संगठन की जिला ईकाई द्वारा पहली बार रतनपुर में एक दिवसीय प्रदेश स्तरीय सामूहिक उपनयन संस्कार का आयोजन किया गया है. 19 फरवरी को विशेष रूप से उपनयन संस्कार का शुभ एवं शुद्ध मुहूर्त की तिथि में 31 ब्राह्मण बटुकों को जनेऊ धारण करवाया गया. सनातन धर्म में कुल सोलह संस्कार होते हैं इसमें उपनयन संस्कार यानी जनेऊ संस्कार को दसवां स्थान प्राप्त है. इस संस्कार के अंतर्गत ही व्यक्ति को जनेऊ पहनाई जाती है. इसे यज्ञोपवीत संस्कार भी कहा जाता है. उपनयन का शाब्दिक अर्थ होता है खुद को अंधकार से दूर रखना और प्रकाश की ओर बढ़ना. जनेऊ के पवित्र धागे को व्यक्ति को आध्यात्म से जोड़े रखते हैं. वह बुरे कर्म, बुरे विचारों से दूर रहता है. यज्ञोपवीत या जनेऊ धारण करने वाले को यज्ञ और स्वाध्याय करने का अधिकार प्राप्त हो जाता है. यही वजह है कि सनातन धर्म में जनेऊ संस्कार बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. यज्ञोपवीत या जनेऊ धारण करने से त्रिदेव का आशीर्वाद मिलता है. आचार्यों के द्वारा संपूर्ण विधि विधान के साथ तैयार मंडप में सभी देवी देवताओं का पूजन करने के बाद वैदिक रीति रिवाज एवं प्रचलित परंपरानुसार के अनुसार इस कार्यक्रम में सबसे पहले तेलमाटी, मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, चिकट, मातृका पूजन हुआ इसके बाद उपनयन संस्कार के लिये उपस्थित सभी बटुकों का मुंडन करवाया गया. पुनः स्नान के बाद सभी बटुकों ने आठ ब्राह्मणों के साथ भोजन कर अष्ट ब्राह्मण भोज की विधि संपन्न की. इसके बाद आचार्यों ने पलाश दंड पकड़े हुए बटुकों को जनेऊ धारण करवाकर भगवान सूर्यनारायण का दर्शन करवाया. तत्पश्चात् ब्राह्मणों द्वारा प्रत्येक बटुक को कान में गायत्री मंत्र की दीक्षा दी गयी. शिक्षा के अंतर्गत बताया गया कि जनेऊ के बाद किन-किन नियमों का पालन करना है. इसके बाद बाद बटुकों ने आयोजन में उपस्थित सभी स्वजनों से "भवति भिक्षां देहि" कहते हुये भिक्षा मांगी.
संस्कार प्रक्रिया संपन्न होने के बाद सभी बटुकों ने नये वस्त्र धारण किये, उसके बाद श्री मंदिर परिसर में ही धूमधाम से आतिशबाजी एवं गाजे-बाजे के साथ उनकी बारात निकाली गयी. पूजा में बटुकों के प्रतिनिधि यजमान के रुप में श्रीमती शशि द्विवेदी एवं पं.राघवेन्द्र द्विवेदी जी पूजन की प्रक्रिया संपन्न की. सामूहिक जनेऊ संस्कार का उद्देश्य समाज में धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण करना तथा नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ना है. उन्होंने कहा कि आगे भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से किए जाएंगे, ताकि समाज में एकता और सांस्कृतिक जागरूकता बनी रहे.
संगठन की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती प्रमिला तिवारी एवं प्रदेश सचिव सजल तिवारी द्वारा जानकारी दी गयी कि जब माता-पिता अपने बच्चों को शिक्षा के लिए भेजते हैं, तब दीक्षा दी जाती थी. सनातन धर्म में दिशाहीन जीवन को एक दिशा देना ही दीक्षा माना जाता है. दीक्षा का अर्थ संकल्प है. किसी भी व्यक्ति को दीक्षा देने का अर्थ दूसरा जन्म और व्यक्तित्व देना है. वैदिक आचार्यों के निर्देशन में मंत्रोच्चार और हवन-पूजन के साथ बटुकों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया. सामूहिक उपनयन संस्कार के माध्यम से बटुकों को सनातन परंपरा, वेदाध्ययन और नैतिक मूल्यों के पालन का संकल्प दिलाया गया. कार्यक्रम स्थल पर धार्मिक वातावरण बना रहा और उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना की.
मातृशक्ति परिषद् की प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती सरोज तिवारी एवं प्रदेश संगठन विस्तार प्रमुख श्रीमती उमा शुक्ला ने बताया कि संगठन द्वारा "उपनयन संस्कार" के सफलतम आयोजन का यह पहला वर्ष है. इस आयोजन में प्रदेश के रायपुर सहित अंबिकापुर, पेन्ड्रा, जांजगीर चांपा, सक्ती, कोरबा, बलौदा बाज़ार आदि विभिन्न जिलों से आये ब्राह्मण बटुकों का उपनयन संस्कार कराया गया है. आचार्य पं.दुर्गा शंकर दुबे, पं.कपिल देव पांडेय, आचार्य डा.राजेन्द्र कृष्ण पांडेय, पं.दीपक दुबे, पं.महेन्द्र पांडेय सहित आठ ब्राह्मणों ने उपनयन संस्कार की विधि को संपन्न कराया.
कार्यक्रम में मंच संचालन संगठन के मुख्य सलाहकार डा.भावेश शुक्ला "पराशर", श्रीमती श्वेता शर्मा, पं.श्रीकांत तिवारी ने किया. इस आयोजन में श्रीमती विभा पांडेय, श्रीमती राही दुबे, श्रीमती सरिता तिवारी, श्रीमती माया दुबे, श्रीमती वंदना शर्मा, श्रीमती स्वाति दीवान, श्रीमती चंद्रकांता गौराहा, श्रीमती भगवती दुबे, श्रीमती नंदिनी तिवारी, श्रीमती किरण शर्मा, श्रीमती उर्वशी शर्मा, श्रीमती शकुंतला शर्मा, श्रीमती प्रीति पांडेय, श्रीमती पुष्पा दुबे, श्रीमती प्रियंका दुबे, पं.नीरज मिश्रा, पं.कृष्णा पांडेय, क्रांति अग्रवाल, मुकेश दुबे, देवेन्द्र शर्मा, दिलीप अग्रवाल, कैलाश पटेल, मदन यदु, राजेश ठाकुर, चेतन धीवर का विशेष सहयोग प्राप्त हुआ.
प्रात: 8 बजे से सायं 6 बजे तक चले इस आयोजन में श्रीमती कालिंदी उपाध्याय, श्रीमती खुशबू शर्मा, श्रीमती संध्या उपाध्याय, श्रीमती प्रीति तिवारी, पं.गौरव मिश्रा सहित छत्तीसगढ़ प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के संगठन प्रतिनिधि उपस्थित थे.।


















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