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Sunday, February 15, 2026

छत्तीसगढ़ में अनेक प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर हैं,

 हितेश मानिकपुरी छत्तीसगढ़।


महाशिवरात्रि आज विषेश -


छत्तीसगढ़ में अनेक प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर हैं, 





छत्तीसगढ़ में अनेक प्राचीन और ऐतिहासिक शिव मंदिर हैं, जो अपनी अनूठी कला और आध्यात्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रमुख मंदिरों में विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग वाला जशपुर का मधेश्वर महादेव, 13वीं सदी का देवबलोदा शिव मंदिर (दुर्ग), और गरियाबंद का प्रसिद्ध भूतेश्वर नाथ (प्राकृतिक शिवलिंग) शामिल हैं, जो भक्तों के लिए विशेष आस्था केंद्र हैं। 

छत्तीसगढ़ के प्रमुख शिव मंदिर:

मधेश्वर महादेव (जशपुर): कुनकुरी में स्थित, इसे विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग माना जाता है, जो गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

देवबलोदा का शिव मंदिर (दुर्ग): 13वीं शताब्दी में कलचुरी काल में बना, यह मंदिर नागर शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है।

भोरमदेव मंदिर (कवर्धा): इसे 'छत्तीसगढ़ का खजुराहो' भी कहा जाता है, जो कलात्मक नक्काशी के लिए प्रसिद्ध है।

लक्ष्मणेश्वर महादेव (खरौद): यह एक बेहद प्राचीन और मान्यता प्राप्त मंदिर है।

तुर्रीधाम (सक्ती): यहाँ का शिव मंदिर महाशिवरात्रि के दौरान तीन दिवसीय मेले के लिए जाना जाता है।

चंडिकेश्वर मंदिर (रायपुर): रायपुर के पास छापोरा गांव में स्थित, यह मंदिर अपने शिवलिंग के बदलते रंग और आकार के लिए रहस्यमयी माना जाता है।

किलकिला शिव मंदिर (जशपुर): एक प्राचीन मंदिर जो अपनी शांत और सुंदर नदी के किनारे स्थित है। 

इन मंदिरों में विशेष रूप से महाशिवरात्रि और सावन के महीने में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है।

डोंगेश्वर महादेव चोड़रा धाम, जंगलपुर घाट ( खैरागढ़) : भक्ति और आस्था केंद्र है डोंगेश्वर महादेव मंदिर चोड़रा धाम - जहां विशाल कैलाश पर्वत के नीचे पताल लोक लगभग 100 फिट पर स्थित सदियों से एक मंदिर है - गौमुख से निरंतर जलाभिषेक शिवलिंग पर होते रहता है। महाशिवरात्रि और कार्तिक पूर्णिमा पर विशाल मेला लगता है।

मंढीप खोल गुफा अंदर शिव लिंग - ठाकुरटोला (खैरागढ़) : ठाकुर टोला जमींदार राजा पुलस्त्य परिवार का 13वीं सदी का छत्तीसगढ़ का एक ऐसा शिव लिंग जहां मंढीप खोल गुफा के अंदर स्थित है।

जो साल में सिर्फ एक बार शिव भक्तों को दर्शन करने का मौका मिलता है। अक्षय तृतीया के आने वाले पहले सोमवार को मंढीप खोल गुफा के द्वार खुलने के बाद ही यह गुफा के अंदर स्थित शिव लिंग का दर्शन करने को मिलता है । वहां विशाल मेला लगता है।

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