पखांजूर/कांकेर से CNI NEWS शंकर सरकार की रिपोर्ट। मो-6268535584
पखांजूर : पखांजूर की बिटिया सुनयना दास ने विदेश (किर्गिस्तान)
में लहराया परचम, प्रथम प्रयास में ही उत्तीर्ण की मेडिकल एफएमजीई परीक्षा।
कहा जाता है कि प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती और अगर इरादे नेक हों, तो सात समंदर पार भी सफलता के झंडे गाड़े जा सकते हैं। इसे सच कर दिखाया है पखांजूर की होनहार बेटी सुनयना दास ने। सुनयना ने विदेश से एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद, भारत की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षाओं में से एक एफएमजीई को अपने पहले ही प्रयास में पास कर लिया है। व्याख्याता शिखा बिश्वदेव दास की सुपुत्री सुनयना बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि की रही हैं। उनकी सफलता की नींव पखांजूर के आराधना कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ी, जहाँ उन्होंने: 10वीं बोर्ड: 91 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण की।
12 वीं बोर्ड: 88 प्रतिशत अंकों के साथ स्कूल टॉपर का खिताब जीता।
वर्ष 2016 में स्काउट एवं गाइड के लिए राज्यपाल पुरस्कार से भी नवाजी जा चुकी हैं। सुनयना केवल चिकित्सा के क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि संगीत और कला में भी पारंगत हैं। उनके पास हारमोनियम (शास्त्रीय गायन) और तबला वादन में 'श्री भारती' की डिग्री है। विदेश में पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने भारतीय लोक संगीत और नृत्य के माध्यम से अपनी जड़ों और देश की संस्कृति का मान बढ़ाया।
"मेरा लक्ष्य एक कुशल डॉक्टर बनकर समाज और अपने देश की सेवा करना है। इस सफलता का पूरा श्रेय मेरे माता-पिता और गुरुजनों को जाता है।"
— डॉ. सुनयना दास
एक छोटे से कस्बे से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्राप्त करना और फिर भारत में डॉक्टर के रूप में अपनी योग्यता सिद्ध करना पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायक है। इस उपलब्धि पर उनके गृहग्राम और स्कूल में जश्न का माहौल है।


















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