मासिक दुर्गाष्टमी व्रत रखने से मां दुर्गा की कृपा प्राप्त होती है।
सी एन आइ न्यूज-पुरुषोत्तम जोशी। मासिक दुर्गाष्टमी व्रत हर माह में अष्टमी तिथि को रखा जाता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 24 फरवरी को है इसलिए इस दिन माता दुर्गा की पूजा और दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गाष्टमी का व्रत रखने से माता दुर्गा की असीम कृपा भक्तों पर बरसती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
मासिक दुर्गाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 24 फरवरी को सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी और 25 फरवरी को सुबह 4 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में दुर्गाष्टमी का व्रत 24 फरवरी को ही मनाया जाएगा। वहीं एकादशी व्रत का पारण 25 फरवरी को होगा।
• सुबह 7 बजकर 1 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होगा इसलिए सुबह 10 बजे तक आप एकादशी व्रत की पूजा कर सकते हैं।
दुर्गाष्टमी पूजा विधि-
• दुर्गाष्टमी के व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर आपको स्नान ध्यान करना चाहिए और पूजा स्थल की भी सफाई भी करनी चाहिए।
• इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल में बैठें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प आपको लें।
फिर चौकी पर लाल वस्त्र के ऊपर माता की प्रतिमा या तस्वीर लगाएं। इसके बाद दीपक और धूप जलाएं।
माता का गंगाजल से अभिषेक करें, सिंदूर, फूल, सोलह श्रृंगार माता को अर्पित करें।
• इसके बाद माता के मंत्रों का जप करें। साथ ही दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी आप कर सकते हैं।
भोग के रूप में माता को फल, मिठाई, हलवा-पूरी आप अर्पित कर सकते हैं।
• पूजा के अंत में माता की आरती का पाठ आपको करना चाहिए।
मासिक दुर्गाष्टमी व्रत के लाभ-
मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत करने से जीवन में नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और मानसिक शांति मिलती है। यह व्रत विशेष रूप से महिलाओं और गृहस्थों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही पारिवारिक सुख-शांति और धन-समृद्धि में भी वृद्धि होती है।
मासिक दुर्गाष्टमी 2026 में माता दुर्गा की कृपा पाने के लिए यह व्रत और पूजा विधि अत्यंत उपयोगी मानी जाती है।
मासिक दुर्गाष्टमी महत्व-
शुक्लपक्ष की अष्टमी तिथि चंद्रमा के बढ़ते चरण का आठवां दिन होता है, जिसमें मासिक दुर्गाष्टमी पड़ती है। इसे देवी ऊर्जा के जागरण का प्रतीक माना गया है। भक्तगण इस दिन देवी शक्ति की पूजा, मंत्रजाप, स्त्रोत का पाठ, व्रत और समस्याओं के ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव से बचने के लिए उपाय भी करते हैं। इसलिए मासिक दुर्गाष्टमी को आध्यात्मिक ऊर्जा के जागरण का प्रतीक भी माना जाता है।


















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