भक्ति और संस्कृति का संगम: सिमगा के सिद्धेश्वर मंदिर में भव्य सांस्कृतिक आयोजन
सिमगा में सिद्धेश्वर मंदिर में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम नगर पालिका परिषद सिमगा द्वारा भारत सरकार एवं छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें दुलदुला छत्तीसगढ़ी रंगोली समिति की विशेष प्रस्तुति रही।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली। कलाकारों ने सुवा, पंथी, राउत नाचा, भरथरी, पंडवानी, गौरा-गौरी जैसे पारंपरिक लोकनृत्य एवं लोकगायन प्रस्तुत कर दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। साथ ही भगवान भोलेनाथ के सुप्रसिद्ध भजनों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कलाकारों ने अपने सांस्कृतिक प्रदर्शन के माध्यम से महाशिवरात्रि के महत्व को भी रेखांकित किया। महाशिवरात्रि का शाब्दिक अर्थ है “शिव की महान रात्रि”। यह पर्व साधना, आत्मशुद्धि, आध्यात्मिक जागरण और आत्मचिंतन का प्रतीक है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन में संयम, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देने वाला अवसर भी है।
भगवान शिव को त्रिदेवों—ब्रह्मा, विष्णु और महेश—में विशेष स्थान प्राप्त है। महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं और शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, दही, घी, शहद एवं गंगाजल से किया जाता है तथा “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप किया जाता है। इस दिन रखा गया व्रत अत्यंत फलदायी माना जाता है, जिससे आत्मसंयम की वृद्धि तथा तन-मन की शुद्धि होती है।
कार्यक्रम में नगर के गणमान्य नागरिकों सहित दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्ति, संस्कृति और परंपरा से ओतप्रोत यह आयोजन नगरवासियों के लिए अविस्मरणीय रहा।
CNI NEWS सिमगा से ओंकार साहू की रिपोर्ट


















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