सौभाग्यशाली हैं वे लोग जो भगवत कथा सुनते हैं — पंडित राजेंद्र प्रसाद शर्मा
बिलाईगढ़। विकासखंड बिलाईगढ़ के ग्राम खुरसूला में विश्वमंगल की कामना से श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन श्रीमती चंदामती साहू, नकुलराम, सहदेव, धरमलाल साहू एवं उनके परिवार द्वारा दिनांक 19 मार्च 2026 से 27 मार्च 2026 तक किया जा रहा है। कथा प्रतिदिन दोपहर लगभग 2:00 बजे से हरि इच्छा तक संचालित हो रही है।
कथा में पंडित राजेंद्र प्रसाद शर्मा व्यासपीठ पर विराजमान होकर अपनी सरल, सरस एवं ओजमयी वाणी में संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा का रसपान करा रहे हैं। वे मूलतः ग्राम भैंसो (पामगढ़) के निवासी हैं एवं वर्तमान में बिलासपुर के उसलापुर क्षेत्र में निवासरत हैं।
कथा के प्रथम दिवस मंगलाचरण के पश्चात कथा प्रारंभ करते हुए पंडित शर्मा ने कहा कि जो लोग भगवत कथा का श्रवण करते हैं, वे अत्यंत सौभाग्यशाली होते हैं। उन्होंने बताया कि भगवत कथा केवल मृत्यु लोक में ही होती है, यहां तक कि बैकुंठ लोक में भी इसका आयोजन नहीं होता। उन्होंने श्रीहनुमानजी को कथा का महान रसिक बताते हुए कहा कि वे कथा श्रवण के लिए ही मृत्यु लोक में स्थित हैं।
कथावाचक ने कहा कि कथा श्रवण से मन को शांति मिलती है, बुद्धि का विकास होता है और जीवन की व्यथाएं दूर होती हैं। उन्होंने श्रोताओं से आह्वान किया कि कथा में कही गई श्रेष्ठ बातों को जीवन में अपनाकर परिवार और समाज का कल्याण करें। उन्होंने श्रीरामचरितमानस की चौपाई “बड़े भाग मानुष तन पावा…” का उल्लेख करते हुए मानव जीवन की महत्ता पर प्रकाश डाला।
अपने प्रवचन में उन्होंने वर्तमान समाज की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजकल “बेटे” और “लड़के” तो बहुत हैं, लेकिन “पुत्र” कम दिखाई देते हैं। उन्होंने समझाया कि पुत्र वही है जो अपने पूर्वजों का उद्धार करता है और माता-पिता का सम्मान करता है। उन्होंने माता-पिता के प्रति सम्मान और सेवा को जीवन का मूल कर्तव्य बताया।
कथा के दौरान पंडित शर्मा ने मधुर भजनों के माध्यम से भी श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। श्रीमद्भागवत महात्म्य के अंतर्गत आत्मदेव ब्राह्मण एवं धुंधकारी की प्रेत योनि से मुक्ति की कथा का विस्तृत वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से प्रेत योनि से भी मुक्ति संभव है।
कार्यक्रम के अंत में श्रीराम भजनों, आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ प्रथम दिवस की कथा को विराम दिया गया। आयोजकों एवं कथावाचक द्वारा अधिक से अधिक श्रद्धालुओं से कथा में शामिल होकर धर्म लाभ लेने की अपील की गई है।


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.