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Tuesday, April 14, 2026

भांसी दंतेवाड़ा जिले के धुरली. गमावाडा़ नल जल परियोजना पिछले लगभग एक साल बंद पडा हैं 45 करोड़ 65 लाख का जल प्रोजेक्ट ठप, 9 करोड़ की योजना भी बंद: प्यासे 26 गांव, जिम्मेदार मौन

 बीग ब्रेकिंग

लोकेशन दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़

रिपोर्टर  असीम पाल दंतेवाड़ा



भांसी दंतेवाड़ा जिले के धुरली. गमावाडा़ नल जल परियोजना पिछले लगभग एक साल बंद पडा हैं



45 करोड़ 65 लाख का जल प्रोजेक्ट ठप, 9 करोड़ की योजना भी बंद: प्यासे 26 गांव, जिम्मेदार मौन


छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में करोड़ों रुपये की लागत से बनी जल आपूर्ति योजनाएं आज पूरी तरह ठप पड़ी हैं। करीब 45 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत से तैयार गमाबाड़ा जल परियोजना पिछले लगभग एक वर्ष से बंद है, 




जिससे इससे जुड़े 18 गांव—भाँसी, धुरली, बड़े कमेली, दुगेली, मुलसनार, पोरोकमेली, भाँसी मासापारा सहित अन्य गांव—गंभीर पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। 




वहीं नेरली क्षेत्र में 9 करोड़ रुपये की दूसरी योजना भी पूरी तरह ठप है, जिससे 8 गांव प्रभावित हैं। इस तरह कुल 26 गांव पानी की भारी किल्लत झेल रहे हैं।


जानकारी के अनुसार, अगस्त 2025 में हुई भारी बारिश और बाढ़ के दौरान शंकनी-डंकनी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया था। इसी दौरान गमाबाड़ा फिल्टर प्लांट का सप्लाई सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया और नदी किनारे बनी संरचनाओं में गाद व मिट्टी भर जाने से जल आपूर्ति पूरी तरह बंद हो गई।




हैरानी की बात यह है कि एक वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो सिस्टम की गंभीर मरम्मत हुई है और न ही जल आपूर्ति बहाल करने के ठोस प्रयास दिखाई दे रहे हैं।



गौरतलब है कि गमाबाड़ा फिल्टर प्लांट का उद्घाटन 20 जून 2021 को किया गया था और शुरुआती दौर में कई गांवों तक नियमित जल आपूर्ति भी शुरू हुई थी, लेकिन वर्तमान में पूरा सिस्टम ठप पड़ा है।


दूसरी ओर नेरली का 9 करोड़ रुपये का जल प्रोजेक्ट भी लंबे समय से बंद है, जिससे वहां के 8 गांवों में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है।




 दोनों योजनाओं के बंद होने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद लोगों को पीने का पानी क्यों नहीं मिल पा रहा है।



स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण और पाइपलाइन कार्य के दौरान कार्यदायी संस्थाओं, जिनमें L&T जैसी कंपनियों की भूमिका रही है, ने नालों और प्राकृतिक जल मार्गों में भारी मात्रा में मिट्टी और मलबा डाल दिया, जिससे जल स्रोत प्रभावित हुए और पूरी व्यवस्था बिगड़ गई।



गर्मी बढ़ने के साथ ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ती जा रही है। कई गांवों में लोग आज भी दूर-दराज से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि कुछ स्थानों पर पारंपरिक चुआ ही एकमात्र सहारा बना हुआ है।




स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी से स्थिति और गंभीर होती जा रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो यह मामला बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।





इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि बाढ़ के दौरान दंतेवाड़ा स्थित सप्लाई सिस्टम को नुकसान पहुंचा था। वर्तमान में मरम्मत और सुधार कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। 




अधिकारियों के अनुसार, “तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण काम में देरी हुई है, लेकिन जल्द ही कार्य शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है।” हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि टेंडर प्रक्रिया को लेकर  हो रहे देरी की वजह से क्या वो प्यासे मर जाय सवाल बना हुआ हैं?और अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस काम शुरू  क्यों नहीं हुआ है।


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