दिनांक=07/04 / 2026
स्थान.ग्राम पंचायत नेरली
दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़
संवाददाता=असीम पाल
नेरली .ग्राम पंचायत में ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजना ठप, 8 गांवों के लोग बूंद-बूंद पानी को तरसे
दंतेवाड़ा जिले के -नेरली ग्राम पंचायत क्षेत्र में पेयजल संकट एक बार फिर गहराता जा रहा है। शासन की महत्वाकांक्षी ग्रामीण समूह जलप्रदाय योजना पूरी तरह ठप पड़ गई है, जिससे करीब 8 गांवों के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2016-17 में इस योजना के तहत फिल्टर प्लांट और पंप हाउस का निर्माण किया गया था, जिसका उद्देश्य समलवार, पीनाबचेली, पालनार, नेरली, कलेपाल सहित आसपास के कुल 8 गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना था। लेकिन वर्तमान में यह पूरी व्यवस्था बंद पड़ी है।
सूत्रों के मुताबिक, एलएंडटी कंपनी द्वारा एनएमडीसी परियोजना के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान नाले के पानी में अत्यधिक मिट्टी और गाद मिल जाने से जलस्रोत दूषित हो गया। इसके चलते फिल्टर प्लांट तक पहुंचने वाला पानी उपयोग योग्य नहीं रह गया और मजबूरन पंप हाउस को बंद करना पड़ा।
इसके अलावा, रेलवे लाइन के दोहरीकरण कार्य ने भी इस समस्या को और बढ़ा दिया है। पाइपलाइन कई स्थानों पर प्रभावित हुई है, जिससे जल आपूर्ति पूरी तरह बाधित हो गई है। नेरली,पीना बचेली क्षेत्र में पहले पानी सप्लाई आ रहा था लेकिन अब पिछले लगभग 6 महीनों से पेयजल आपूर्ति पूरी तरह बंद है।
कुछ गांवों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन नियमित जल आपूर्ति आज तक शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीण आज भी कुएं, चुआ और पुराने जलस्रोतों पर निर्भर हैं। भीषण गर्मी में हालात और बदतर हो गए हैं—लोगों को गंदा और असुरक्षित पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
समलवार ग्रामीणों लच्छु तेलाम ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द फिल्टर प्लांट और पंप हाउस को चालू किया जाए, क्षतिग्रस्त पाइपलाइन की मरम्मत की जाए और स्वच्छ पेयजल की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अधिकारियों ने कहा नया प्लांट लगाने की तैयारी, पुराने पर उठे सवाल
इस संबंध में जब अधिकारियों से जानकारी ली गई, तो उन्होंने बताया कि वर्तमान फिल्टर प्लांट को बंद कर नए फिल्टर प्लांट के लिए टेंडर जारी किया जाएगा और नए संयंत्र की स्थापना की जाएगी।
हालांकि इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
और जब इस मामले की जानकारी फोन में लेनी चाही तो नेरली पंचायत के सरपंच फोन उठाना जरूरी नहीं समझा
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पहले ही तकनीकी जांच और निरीक्षण सही तरीके से किया गया होता, तो आज यह स्थिति नहीं बनती। अब नया प्लांट लगाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है।
तकनीकी खामियों और जिम्मेदारी तय करने के सवाल पर अधिकारी स्पष्ट जवाब देने से बचते नजर आए और उन्होंने उच्च अधिकारियों से संपर्क करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो विकराल होगा संकट
यदि समय रहते इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में जल संकट और भी भयावह रूप ले सकता है। ग्रामीणों की उम्मीद अब शासन-प्रशासन की त्वरित कार्रवाई पर टिकी हुई है।




















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