जबलपुर भोपाल मध्यप्रदेश।
गाने की कोई उम्र नहीं होती, संगीत ही दिलों को जवान रखता है — कलावीथिका में सजी ‘साज़ और आवाज़’ की सुरमयी शाम
संगीत प्रेमियों के लिए 12 अप्रैल को कलावीथिका जबलपुर में आयोजित ‘साज़ और आवाज़’ की गीतों भरी शाम यादगार बन गई।
कार्यक्रम का आयोजन साज़ और आवाज़ के संस्थापक श्री हेलकर, श्री सी. डी. खड़से एवं उद्घोषिका शबनम मसीह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत पद्मभूषण स्वर्गीय आशा ताई को श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई।
आकाशवाणी की शबनम मसीह ने अपनी मधुर आवाज़ में “आगे भी जाने न तू” प्रस्तुत कर पूरे सभागार को संगीतमय वातावरण से भर दिया।
इसके पश्चात एक से बढ़कर एक पुराने सदाबहार हिंदी फिल्मी गीतों की प्रस्तुति दी गई, जिनमें
“ये समा समा है प्यार का”,
“तुम्हें देखती हूँ तो लगता है ऐसे”,
“छू लेने दो नाज़ुक होंठों को”,
“दिल की ये आरज़ू थी कोई”,
“ये नयन डरे डरे”,
“सौ बार जन्म लेंगे” तथा
“जाने जां ढूंढता फिर रहा”
जैसे लोकप्रिय गीतों ने श्रोताओं का मन मोह लिया।
विशेष आकर्षण के रूप में सबसे कम उम्र की प्रतिभागी नायरा दुबे ने अपने पिता के साथ संगीत प्रस्तुति देकर सभी का दिल जीत लिया।
गायक कलाकारों में मीनल चौधरी, मनीष निगम, उज्ज्वला हेलकर, नायरा दुबे, प्रशांत श्रीवास्तव, मुकुल वर्मा एवं लक्ष्मी झरिया ने शानदार प्रस्तुतियां दीं।
साजिंदों में मेहुल खड़तिया, शम्भू, कोरी जी एवं दिनेश खड़तिया की संगत ने कार्यक्रम को और भी प्रभावशाली बनाया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगीत प्रेमी उपस्थित रहे,
जिनमें रितु श्रीवास्तव, राकेश चौरसिया, कर्नल मदान, महेंद्र पांडे, पूजा कपूर, प्रीत, नीलम सेठी,डॉ. शालिनी, ओलिव सिंह, राकेश शुक्ला, वीरेंद्र सिंह, हिमांशु तिवारी, मनोज रजक, सोफिया सहित अनेक गणमान्य श्रोता शामिल रहे।
उल्लेखनीय है कि ‘साज़ और आवाज़’ संस्था द्वारा केवल पुराने हिंदी सिनेमा के मधुर गीतों की प्रस्तुतियां दी जाती हैं, जो शहर के संगीत प्रेमियों के बीच विशेष लोकप्रिय हैं।
– दीपक सेठी
जबलपुर (मध्य प्रदेश)
9826162271



















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