गरीब , शोषित और पीड़ित वर्ग के लिये संघर्षरत हैं पं० राधेश्याम शर्मा
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर - जनआंदोलनों , लोकचेतना और सामाजिक न्याय के प्रश्नों पर अपनी सशक्त एवं निर्भीक भूमिका के लिये विख्यात पं० राधेश्याम शर्मा को लेकर सामाजिक चिंतक खगेश्वर प्रसाद चौबे ने उन्हें जनप्रतिरोध , सत्यनिष्ठा और लोकबल का प्रेरक प्रतीक बताया है। उन्होंने जारी वक्तव्य में कहा कि इन्होंने समय-समय पर व्यवस्था की विसंगतियों , जनविरोधी प्रवृत्तियों तथा जनहित से जुड़े गंभीर विषयों पर अपनी मुखर और प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योग समूहों , प्रशासनिक तंत्र , न्यायिक संस्थाओं तथा सत्ता के प्रभावशाली केंद्रों से जुड़े विषयों पर भी राधेश्याम शर्मा ने निर्भीकता के साथ जनता की आवाज़ को उठाया है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से लेकर अन्य राज्यों तक जनजागरण और जनआंदोलन की चेतना जगाने में उनकी भूमिका उल्लेखनीय रही है। वे गरीब , वंचित , शोषित और पीड़ित वर्ग के लिये सदैव संघर्षरत रहे हैं तथा समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज़ को व्यवस्था तक पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते रहे हैं। चौबे ने कहा कि राधेश्याम का व्यक्तित्व केवल सामाजिक संघर्ष तक सीमित नहीं है , बल्कि वह आध्यात्मिक साधना , सादगी , त्याग और लोकसमर्पण का भी अद्भुत संगम है। वे अवधूत भगवान श्रीराम के दीक्षित शिष्य होने के कारण अपने जीवन में आध्यात्मिक अनुशासन और जनसेवा की विरल परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि विभिन्न अवसरों पर उन्होंने जनहित के मुद्दों पर प्रतीकात्मक , मुखर और प्रभावशाली आंदोलनों के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। उनकी संघर्षशीलता इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प जनहित का हो और उद्देश्य लोककल्याण का हो , तो एक अकेला व्यक्ति भी व्यवस्था को आत्ममंथन के लिये विवश कर सकता है। सामाजिक चिंतक चौबे ने कहा कि आज के समय में जब बहुत से लोग सत्य और जनहित के पक्ष में खुलकर बोलने से बचते हैं , तब राधेश्याम शर्मा जैसा निर्भीक , स्पष्टवादी और जनसमर्पित व्यक्तित्व समाज के लिये प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन संघर्ष , साहस , सादगी और लोकनिष्ठा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके गांव पेंडरुआ के होने के साथ-साथ पारिवारिक रूप से भी अत्यंत आत्मीय एवं श्रद्धेय व्यक्तित्व हैं। इस कारण उनके प्रति यह सम्मान केवल सार्वजनिक नहीं , बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक श्रद्धा से भी जुड़ा हुआ है। चौबे ने कहा मुझे यह सौभाग्य प्राप्त है कि राधेश्याम जैसे तेजस्वी , संघर्षशील और लोकहितैषी व्यक्तित्व का सान्निध्य मुझे मिला। उनके साथ बिताये क्षण मेरे लिये प्रेरणा , आशीर्वाद और जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संबल हैं। अंत में सामाजिक चिंतक चौबे ने राधेश्याम के उत्तम स्वास्थ्य , दीर्घायु एवं सतत जनसेवा के लिये शुभकामनायें प्रकट करते हुये कहा कि उनका जीवन समाज के लिये प्रेरणा स्तम्भ के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा।


















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