छत्तीसगढ़।
ग्रामीणों का घोर विरोध: देवरी-घुलघुल में उबाल, बोले—किसी भी कीमत पर नहीं खुलने देंगे कारखाना
तिल्दा तहसील के देवरी-घुलघुल क्षेत्र में प्रस्तावित अग्रसेन स्टील एंड पावर परियोजना के खिलाफ ग्रामीणों का विरोध अब चरम पर पहुंच गया है। 8 अप्रैल को होने वाली जनसुनवाई से पहले ही गांव में माहौल पूरी तरह गरमा गया है और ग्रामीणों ने साफ शब्दों में चेतावनी दे दी है—“किसी भी कीमत पर कारखाना नहीं खुलने देंगे।”
ग्रामीणों का कहना है कि जिस भूमि पर उद्योग स्थापित करने की योजना बनाई गई है, वह वर्षों से चारागाह के रूप में उपयोग हो रही है। इस जमीन से गांव के सैकड़ों मवेशियों का जीवन जुड़ा हुआ है। ऐसे में यहां फैक्ट्री लगने से न केवल पशुपालन प्रभावित होगा, बल्कि पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पर भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
इस पूरे विरोध की सबसे मजबूत कड़ी गांव की महिलाएं बनकर उभरी हैं। देवरी और घुलघुल की नारी शक्ति ने एकजुट होकर मोर्चा संभाल लिया है। गांव-गांव बैठकों का दौर जारी है और महिलाएं खुलकर कह रही हैं कि वे अपने हक और जमीन की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएंगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि बिना ग्राम पंचायत की सहमति और बिना एनओसी के ही जनसुनवाई की तारीख तय कर दी गई है। इतना ही नहीं, जनसुनवाई का स्थान भी बदलकर दूसरे गांव में रखा गया, जिससे लोगों में आक्रोश और बढ़ गया है।
पूर्व सरपंचों, पंचों और जनप्रतिनिधियों सहित आसपास के गांवों के लोग भी इस विरोध में कूद पड़े हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोग निजी स्वार्थ में इस परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं और गांव में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब पूरा क्षेत्र एकजुट होकर इसके खिलाफ खड़ा है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जनसुनवाई रद्द नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे और किसी भी अप्रिय स्थिति की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
अब सबकी निगाहें 8 अप्रैल पर टिकी हैं—जहां यह तय होगा कि ग्रामीणों की एकता भारी पड़ेगी या प्रस्तावित परियोजना आगे ।



















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