प्रेम और सच्चे भाव के भूखे हैं भगवान - पं० गौरव जोशी
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
जांजगीर चाम्पा - समीपस्थ ग्राम भड़ेसर में श्रीमति हेमनलिनी / नर्मदा प्रसाद उपाध्याय की स्मृति में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ के पंचम दिवस आज का पूरा वातावरण भगवान श्रीकृष्ण की मधुर बाल लीलाओं से गुंजायमान हो गया।
कथाव्यास पं० गौरव जोशी (नगोई वाले) ने अपनी अमृतमयी वाणी से भगवान श्रीकृष्ण की बृज लीलाओं का ऐसा सजीव वर्णन किया कि उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमने लगे। पंचम दिवस की कथा का मुख्य आकर्षण माखन चोरी , गोवर्धन पूजा , छप्पन भोग की प्रसादी और मटकी फोड़ का भव्य आयोजन रहा। महाराजश्री ने कथा का शुभारंभ करते हुये भगवान की बाल लीलाओं , पूतना वध , बकासुर और अघासुर वध के प्रसंगों का अत्यंत मार्मिक वर्णन किया। उन्होंने माखन चोरी लीला का आध्यात्मिक रहस्य समझाते हुये कहा कि भगवान केवल माखन नहीं चुराते , बल्कि वे अपने भक्तों का निर्मल और निष्पाप हृदय चुराते हैं। उन्होंने बताया कि गोपियों का प्रेम इतना निश्चल था कि साक्षात परब्रह्म उनके घरों में जाकर माखन खाने को विवश हो जाते थे। इन प्रसंगों के दौरान मंच पर बाल कृष्ण द्वारा सखाओं के साथ माखन चुराने की मनमोहक झांकी प्रस्तुत की गई , जिसने सभी का मन मोह लिया। कथा के अगले चरण में महाराजश्री ने देवराज इंद्र के अहंकार मर्दन और गोवर्धन पूजा का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने बृजवासियों को प्रकृति और पर्यावरण प्रेम का संदेश देते हुये गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। जब इंद्र ने क्रोधित होकर प्रलयंकारी वर्षा की , तब कन्हैया ने अपनी कनिष्ठा (छोटी उंगली) पर विशाल गोवर्धन पर्वत को धारण कर समस्त बृजवासियों की रक्षा की। इसी प्रसंग के साथ कथा स्थल पर गोवर्धन महाराज की सजीव झांकी सजाई गई और भव्य पूजा-अर्चना संपन्न हुई। यजमान उपाध्याय परिवार और ग्रामवासियों द्वारा भगवान को श्रद्धापूर्वक छप्पन भोग (56 प्रकार के व्यंजनाें) का नैवेद्य अर्पित किया गया , जिसकी अलौकिक छटा देखते ही बन रही थी। महोत्सव के दौरान कथा पंडाल में 'मटकी फोड़' का विशेष और ऊर्जावान आयोजन किया गया। ऊँचाई पर बंधी माखन की मटकी को तोड़ने के लिये युवाओं और बालकों ने उत्साहपूर्वक गोविंदाओं की टोलियां बनाईं। जैसे ही मटकी फूटी और माखन-मिश्री की वर्षा हुई , पूरा भड़ेसर 'हाथी घोड़ा पालकी , जय कन्हैया लाल की' के नारों से गूंज उठा। उपस्थित महिला-पुरुष श्रद्धालु अपनी जगह पर खड़े होकर भजनों पर जमकर थिरकने लगे और उत्सव का आनंद लिया। कथाव्यास पं० गौरव जोशी ने अपने संदेश में कहा कि गोवर्धन लीला हमें सिखाती है कि भगवान केवल प्रेम और सच्चे भाव के भूखे हैं , मनुष्य के भीतर का अहंकार भगवान को कभी प्रिय नहीं होता। कार्यक्रम के अंत में उपाध्याय परिवार द्वारा गोवर्धन महाराज और बांके बिहारी जी की भव्य महाआरती उतारी गई और उपस्थित विशाल जनसमूह को छप्पन भोग का महाप्रसाद वितरित किया गया। कथा के मुख्य यजमान एवं आयोजक श्रीमति रोशनी राकेश उपाध्याय ने सभी श्रद्धालुओं से कथा पाण्डाल में पहुंचकर कथा श्रवण कर पुण्य लाभ लेने की अपील की है।



















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