राजनांदगांव। जब समाज में बदलाव की सच्ची चाह होती है, तो एक व्यक्ति भी जनआंदोलन की शुरुआत कर सकता है। ऐसी ही प्रेरणादायक पहल कर रही है
श्रीमती संगीता गजभिए, जो गांव-गांव जाकर बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता की अलख जगा रही हैं। उनका उद्देश्य स्पष्ट है—हर बच्चे को सुरक्षा, सम्मान और न्याय मिले, और वह अपने अधिकारों को समझते हुए निर्भय होकर आगे बढ़ सके।
श्रीमती गजभिए इन दिनों ग्रामीण क्षेत्रों में सघन जनसंपर्क अभियान चला रही हैं। वे छात्रावासों, आश्रम शालाओं और स्कूलों में पहुंचकर बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों की जानकारी दे रही हैं। वे सरल और संवादात्मक शैली में बच्चों को समझाती हैं कि शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान उनका अधिकार है, और किसी भी प्रकार के शोषण या दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाना उनकी ताकत है।
विशेष रूप से वे बच्चों को पॉक्सो एक्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दे रही हैं। इस कानून के प्रावधानों को वे सहज उदाहरणों के माध्यम से समझाती हैं, ताकि बच्चे और शिक्षक दोनों इसकी गंभीरता और उपयोगिता को समझ सकें। उनके सत्रों में यह भी बताया जाता है कि किसी भी प्रकार की अनुचित घटना होने पर तुरंत शिकायत कैसे और कहां की जाए।
इसके साथ ही वे बढ़ते साइबर अपराधों के खतरे से बच्चों को सावधान कर रही हैं। मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग के दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, अजनबी लोगों से ऑनलाइन बातचीत के जोखिम क्या हो सकते हैं इन विषयों पर वे खुलकर चर्चा करती हैं। ‘गुड टच और बैड टच’ जैसे संवेदनशील विषय को भी वे बेहद संवेदनशीलता और स्पष्टता के साथ बच्चों के सामने रखती हैं, ताकि वे सही और गलत व्यवहार में अंतर पहचान सकें।
ग्रामीण अंचलों में इस प्रकार की जागरूकता पहल को अभिभावकों और शिक्षकों से भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है। श्रीमती संगीता गजभिए का यह प्रयास से


















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