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लोकेशन दंतेवाड़ा. छत्तीसगढ़
रिपोर्टर। असीम पाल दंतेवाड़ा
दिनांक 21/5/2026
नेरली मेन रोड से बेहनार सड़क बनी “मुरुम का जाल”, एंबुलेंस तक पहुंचना जोखिम भरा 3.5 KM का रास्ता बदहाली में
दंतेवाड़ा जिले के ग्राम पंचायत नेरली मेन रोड से बेहनार गांव को जोड़ने वाली करीब से 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क आज विकास की जगह लापरवाही की तस्वीर बन गई है। यह मार्ग पूरी तरह अंदरूनी क्षेत्र को जोड़ता है, जहां चारपहिया वाहनों की आवाजाही बेहद कम है और कई स्थानों पर तो यह नाम मात्र की सड़क रह गई है।
ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग पर न तो मजबूत डामर (ब्लैक टॉप) दिखाई देता है और न ही नियमित मरम्मत का कोई असर। पूरी सड़क पर सिर्फ मुरुम और बड़े-बड़े पत्थरों का ढेर फैला हुआ है, जिससे यह रास्ता चलने योग्य नहीं बल्कि चुनौतीपूर्ण बन गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां ज्यादातर लोग पैदल, साइकिल या मोटरसाइकिल से ही बचेली या जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा आवाजाही करते हैं। कुछ ही घरों में मोटरसाइकिल उपलब्ध है, जबकि चारपहिया वाहन बेहद सीमित हैं। ऐसे में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए यही जर्जर रास्ता ही एकमात्र सहारा है।
सबसे गंभीर स्थिति आपातकालीन सेवाओं को लेकर है। ग्रामीण बताते हैं कि गांव में किसी के बीमार होने पर एंबुलेंस जरूर पहुंचती है, लेकिन इस खराब सड़क के कारण मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना हमेशा जोखिम भरा रहता है। कई बार एंबुलेंस को भी पत्थरों और ऊबड़-खाबड़ रास्ते के कारण कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
इसके अलावा इस क्षेत्र में नेटवर्क और बुनियादी सुविधाओं की कमी भी स्थिति को और गंभीर बना देती है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति में ग्रामीणों को काफी संघर्ष करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क केवल एक मार्ग नहीं बल्कि उनके जीवन का सहारा है, लेकिन मौजूदा हालत में यह सहारा अब खतरे में बदल चुका है। उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क का पुनर्निर्माण और स्थायी पक्कीकरण करने की मांग की है।
वहीं बेहनार गांव से नेरली होते हुए बचेली पहुंचना भी ग्रामीणों के लिए किसी बड़ी परीक्षा से कम नहीं है। हालांकि इस मार्ग पर पुल निर्माण कार्य जारी है, लेकिन पुल बनने के बाद भी पूरी सड़क की स्थिति जस की तस बनी हुई है। निर्माणधीन पुल के बाद आज भी पूरी सड़क कच्ची है और नेरली तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को निर्माणधीन पुल क़े नीचे से आज भी नाला पार करना पड़ता है। बरसात के दिनों में यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है, जिससे आवागमन लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्यों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुविधा न मिलने से उनकी परेशानी कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है।




















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