सुशासन त्यौहार को लेकर जनमानस में सरकार के खिलाफ आक्रोश को भाजपा नेता ने जताई चिंता
डोंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र मे सुशासन कार्यक्रम के दौरान कई जगहों पर आमजनता का आक्रोश देखने को मिल रहा है इससे सरकार और प्रशासन सकते मे हैl इस प्रकार के जनता के आक्रोश और प्रदर्शन से सबक लेकर पार्टी को सीख लेना चाहिए कि, इसका भविष्य मे परिणाम क्या हो सकता हैl डोंगरगढ़ भाजपा के अंतिम पंक्ति के कार्यकर्त्ता महेंद्र कुमार अग्रवाल ने पार्टी के कुछ पुराने स्वयंभु नेतृत्वकर्ताओ को आगाह किया कि अभी समय है प्रशासन पर अंकुश रख जनता के हित का भी ध्यान रखे थोड़ा आमजनता के लिये थाना, तहसील,कचहरी जैसे कार्यालय का भी चक्कर लगाया करे आज वर्षो से जमे चाटुकारिता के भरोसे राजनीती ना करे l वर्तमान मे प्रशासन निरंकुश है उस पर लगाम कसना जरुरी है l इसका एक कारण यह भी है हर जगह अवसरवदियों और चालूसों कि पूछ परख हैl जिनका आम जनता से कोई मेलमिलाप नहीं है सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए वर्षो से जमे है सिर्फ अपने व्यवसाय पर ध्यान देते है ऐसे लोग आज डोंगरगढ़ मे नेतागिरी करते है l काम करने वाले लोगो को संघठन से दूर कर दिया जाता है, श्री अग्रवाल ने आगे कह कुछ स्वयभू पुराने कार्यकर्त्ता तो नासूर बन चुके जो अंदर ही अंदर पार्टी को खोखला कर रहे है जिनको डोंगरगढ़ कि जनता और हित से कोई मतलब नहीं होता बस ऊपर के नेता पहचानते है इसी से वो अपने आप को बड़ा नेता मान लिया और उनकी नेतागिरी चलती रहती है l इन परिस्थितियों को देखते हुए एक कविता याद आ गई
"तुम्हारी सोच के साचे मे ढल नहीं सकता,
जबान काट लो, लहजा बदल नहीं सकता
मुझे भी मोम का पुतला समझ रहे हो क्या,
तुम्हारी लौ से ये लोहा पिघल नहीं सकता l "


















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