बाासूकी ठाकुुर > जगदलपुर, कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु लाॅकडाउन के दौरान बस्तर जिले के ग्रामीणों द्वारा जंगल और घरो की बाड़ी में संग्रहित किए वनोपज, आज उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में सहायक बना है। बस्तर के चार वनमंडलो में हो रही वनोपज की खरीदी से ग्रामीणों के चेहरे खिले हुए हैं। वन
विभाग के 15 समितियों के जरिए वनधन विकास योजना के अन्तर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य में बस्तर वनमण्डल अंतर्गत राष्ट्रीय आजीविका मिशन के महिला स्व-सहायता समूहो के माध्यम से लघु वनोपज का संग्रहण किया जा रहा है। वन विभाग के अधिकारियों के निर्देशन में समिति के सदस्यों द्वारा ग्राम स्तर पर डोर-टू-डोर वनोपज की खरीदी कर रहे है।
लाॅकडाउन में प्रतिबंध से छूट मिलते ही ग्राम स्तर के 138 समूहों द्वारा ईमली 7397.43 क्विंटल एवं चरौटा, बीज, हर्रा, बहेड़ा, कालमेघ, ईमली, नागरमोथा, धवई फूल, महुआ फूल, गिलोय, बहेडा़ कचरिया, भेलवा, वनतुलसी एवं वनजीरा 945.90 क्विंटल सहित कुल 8343.33 क्विंटल संग्रहण किया गया है। उपरोक्त वनोपज का भंडारण जगदलपुर स्थित कोल्ड स्टोरेज में किया जा रहा है।
वनमंडलाधिकारी एवं प्रबंध संचालक सुश्री स्टाइलो मंडावी ने बताया कि राष्ट्रीय आजीविका मिशन के महिला स्व-सहायता समूहों के माध्यम से समर्थन मूल्य के तहत् क्रय किए जा रहे वनोपजो का 11799 संग्राहको को 2 करोड 44 लाख 26 हजार 966 रूपए भुगतान किया जा चुका है। साथ ही वन विभाग के मैदानी अमला, प्रबंधक एवं परिक्षेत्र अधिकारियों, उपवनमण्डाधिकारियों एवं वनमण्डलाधिकारी द्वारा सभी 15 प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी क्षेत्रों में घुम-घुम कर स्व-सहायता समूहो को उच्च गुणवत्ता के वनोपज संग्रहण करने हेतु प्रेरित कर रहे है। कोरोना संक्रमण के लिए शासन द्वारा निर्धारित मापदण्ड अनुरूप सामाजिक दूरी बनाये रखते हुए संग्रहण कार्य सतत् जारी रखे।
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