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Monday, June 1, 2026

रेलवे मेन हॉस्पिटल में मरीजों की लंबी कतार

 ब्रेकिंग न्यूज दाहोद से,

रेलवे मेन हॉस्पिटल में मरीजों की लंबी कतार 



 हॉस्पिटल में जहां कहने को तो 5 रेलवे के डॉक्टर्स, 8 contractual Drs aur 10 case to case doctors  हैं।

फिर भी आज एक ही contractual डॉक्टर रूम नंबर 9 में बैठी थी। बाकी के सभी रूम खाली थे, बस वे ही सभी मरीजों को देख रही थीं, अन्य सारे डॉक्टर्स लापता थे। आश्चर्य की बात तो तब है, जब सीएमएस को कोई परवाह ही नहीं । 



बाहर लंबी लाइन लगी हुई है, गर्मी में बहाल पेशेंट बाहर अपनी बारी का इंतजार करते है,  कितनी लापरवाही  है। जब पेशेंट सुबह इतनी तादाद में आते हैं, तो एक्स्ट्रा डॉक्टर का होना जरूरी है। लेकिन यहां सारे डॉक्टर्स  लापता हैं। रेलवे मेन हाॅस्पिटल में 



एक ही डॉक्टर बैठा है, जो सारे मरीजों को देख रहा है। यह प्रशासन की बहुत बड़ी लापरवाही देखने को मिल रही है, इससे हाॅस्पिटल का नाम भी खराब हो रहा है ।




जबकि ये हाॅस्पिटल 1931 से 1965- 70 तक रेलवे का एक नामी हाॅस्पिटल था। जिसका आजादी से पहले तक पुणे से लाहौर पाकिस्तान तक juridiction था। 



पूरे भारतीय रेलवे से लोग अपना इलाज करवाने आते थे, 

रेलवे छोड़ कर बाहर के लोगों को भी इसी हाॅस्पिटल पर भरोसा था, 

पर हाय रे हाॅस्पिटल की किस्मत, 




आज ऐसी परिस्थिति हो गई कि लोगों को डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं हो पा रहे और सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। कही ओनलाइन ओटिपी नहीं आ रहा, तो कभी नेटवर्क नही आता। लोग धक्के खाये, इनको क्या फर्क पड़ता है। रेलवे तनख़ा तो वक्त पर दे ही रही है। इन्हें क्या फर्क पड़ता है मरीजों कि तकलीफ से। डाॅकटर मस्त, रेलवे का मरीज पस्त ।

दाहोद से पूनम प्रजापति की रिपोर्ट

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