सेवानिवृत्ति के गौरवपूर्ण अवसर पर वीरांगना महारानी दुर्गावती की प्रतिमा स्थापना, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का बना ऐतिहासिक क्षण
खैरागढ़। शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय (सेजेस) साल्हेवारा के वरिष्ठ व्याख्याता श्री बहादुर सिंह खुशरो के दिनांक 31 मई 2026, रविवार को सेवा निवृत्त होने के अवसर पर ग्राम झोरीपारी स्थित दुर्गावती चौक में वीरांगना महारानी दुर्गावती की प्रतिमा का विधिवत स्थापना एवं लोकार्पण समारोह संपन्न हुआ। यह आयोजन खुशरो परिवार,
गोंडवाना सगा समाज तथा ग्रामवासियों के सामूहिक सहयोग से संपन्न हुआ, जिसने सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक चेतना और आदिवासी गौरव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का कार्य किया।
कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक रीति-रिवाजों एवं रूढ़िजन्य परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना के साथ हुई। समाज के वरिष्ठजनों एवं जनप्रतिनिधियों ने वीरांगना महारानी दुर्गावती के त्याग, शौर्य और स्वाभिमान को नमन करते हुए उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तथा उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि महारानी दुर्गावती केवल आदिवासी समाज की ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की वीरता, नारी शक्ति और आत्मसम्मान की प्रतीक हैं। उनकी प्रतिमा की स्थापना नई पीढ़ी को अपने इतिहास, संस्कृति और महान विभूतियों से प्रेरणा लेने का अवसर प्रदान करेगी।
समारोह में मुख्य रूप से श्रीमती हेमलता मंडावी जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक-1, शेरसिंह मेरावी मुड़ादार साल्हेवारा, संजीव ध्रुवे ब्लॉक अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति शासकीय सेवक विकास संघ छुईखदान, संतोष ध्रुवे, कुशाल ध्रुवे, रवि मानिकपुरी, गोवर्धन मेरावी, राजेश ध्रुवे अध्यक्ष युवा प्रभाग गोंड समाज साल्हेवारा, दशरथ पटेल ग्राम पंचायत साल्हेवारा सहित समस्त पंचायत प्रतिनिधि, मोहित मंडावी प्रांताध्यक्ष गोंडवाना सगा समाज, नंदू सिंह खुशरो, बलदाऊ नेताम, असली ध्रुवे, विजय मेरावी, तुलाराम ध्रुवे तथा बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, समाज प्रमुख एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने अपने संबोधन में श्री बहादुर सिंह खुशरो के शिक्षा क्षेत्र में दिए गए दीर्घकालीन योगदान की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपने सेवाकाल में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता एवं नैतिक मूल्यों के संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके सेवा निवृत्त होने के अवसर पर वीरांगना महारानी दुर्गावती की प्रतिमा स्थापना जैसा प्रेरणादायी कार्य समाज के लिए अनुकरणीय उदाहरण है।
समारोह के दौरान सामाजिक सद्भाव, सांस्कृतिक संरक्षण और समाज के उत्थान के लिए सामूहिक प्रयासों पर भी जोर दिया गया। उपस्थित जनसमुदाय ने आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
कार्यक्रम का समापन समाज एवं क्षेत्र की सुख-समृद्धि, उन्नति और आपसी भाईचारे की कामना के साथ हुआ। पूरे आयोजन में उत्साह, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अद्भुत वातावरण देखने को मिला, जिसने इस अवसर को यादगार और ऐतिहासिक बना दिया।





















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