“साजिश या सच्चाई? बिलाईगढ़ विवाद में सीएमओ पर पलटवार, गंभीर आरोपों की लंबी फेहरिस्त आई सामने”*
बिलाईगढ़।
नगर पंचायत बिलाईगढ़ से जुड़े चर्चित प्रकरण ने अब नया और तीखा मोड़ ले लिया है। हाल ही में प्रकाशित समाचारों को पूरी तरह भ्रामक, एकतरफा और सुनियोजित साजिश बताते हुए संबंधित पक्षों ने जोरदार खंडन जारी किया है। उनका आरोप है कि पूरे मामले को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) द्वारा व्यक्तिगत द्वेष और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से गढ़ा गया है।
खंडन में स्पष्ट कहा गया है कि स्वच्छता दीदियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, फर्जी बैठक और न्यायालय में झूठे हलफनामे जैसी बातें पूरी तरह निराधार हैं। जनप्रतिनिधियों का दावा है कि यह पूरी कहानी उनकी छवि धूमिल करने और प्रशासनिक दबाव बनाने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। जो अपने निवास से सारी षडयंत्र और कूटरचना का निर्माण करता है। जिसमें पंचायत के कंप्यूटर और कर्मचारी का उपयोग किया जाता है।
वहीं आरोप यह भी लगाया गया कि खुद सीएमओ सुशील चौधरी ने 9–10 वर्षों से कार्यरत 14 स्वच्छता दीदियों को कार्य से पृथक किया गया, और 8 पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को शारीरिक, आर्थिक और मानसिक प्रताड़ित कर कार्य छोड़ने पर मजबूर किया। और अब वही सीएमओ मामलों को मोड़कर दूसरों पर आरोप लगाया जा रहा है।
“सीसीटीवी और दस्तावेजों का दुरुपयोग?”
खंडन में कहा गया है कि सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया है, जिससे वास्तविक स्थिति को छिपाया जा सके। साथ ही गंभीर आरोप लगाया गया कि सीएमओ पिछले 18 महीनों से नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहे और महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने निवास से ही संचालन करते रहे। ऐसे में सवाल उठाया गया है कि क्या इस अवधि के सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक किए जा सकते हैं?
सीएमओ निवास में षड्यंत्रकरियों का जमावड़ा अनाधिकृत लोगों (महिला/पुरूष) की टोली सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक उनके निवास में लगे सीसीटीवी कैमरे से साफ तौर पर देखा जा सकता है।
“न्यायपालिका का नाम लेकर गढ़ी जा रही कहानी”
संबंधित पक्षों ने यह भी कहा कि न्यायालय का नाम लेकर पूरे मामले को अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बनाया जा रहा है, जबकि सभी दस्तावेज वैधानिक प्रक्रिया के तहत ही प्रस्तुत किए गए हैं और किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी नहीं हुई है।
“सीएमओ पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप”
खंडन में सीएमओ सुशील चौधरी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कई अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के मामलों की लंबी सूची भी पेश की गई है, जिनमें प्रमुख रूप से—
15 16 वर्षों से कार्यरत 22 कर्मचारियों को बिना परिषद एवं पी आई सी की अनुशंसा लिए बगैर कार्य से पृथक।
2024–25 में सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत लगाए गए सभी 43 आवेदन को बिना जानकारी दिए प्रकरण नास्तिबद्ध किया गया।
सुशासन तिहार 2025 में प्राप्त आवेदनों को बिना कार्यवाही निराकरण।
18 माह से कार्यालय में अनुपस्थित कार्यालय के समस्त विभागों का महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने निवास में रखकर कार्यालीन कार्यों का संचालन।
पिछले 11 माह से पीआईसी परिषद का बैठक आहूत नहीं किया गया।
नगर क्षेत्रांतर्गत लगभग 70 80 बिना भवन अनुज्ञा के भवन निर्माण में सीएमओ की संलिप्तता।
बिना सक्षम स्वीकृति के निकाय के टैंकर एवं कंटेनर का अवैध बिक्री करना।
10 लाख रुपए के फायर ब्रिगेड घोटाला
फर्जी भवन अनुज्ञा जारी कर लाखों की उगाही।
कर्मचारियों का ईपीएफ की राशि घोटाला
20 लाख की लागत से निर्मित अटल परिसर निर्माण में प्रतिमा खरीदी से लेकर पूरे निर्माण में गंभीर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार एवं 5–6 महीने बाद उन्हीं निर्माण कार्यों में मरम्मत, गार्डन निर्माण के नाम पर पार्षद निधि से लाखों की आहरण।
वर्ष 2024–25 में नाला सफाई एवं गहरीकरण के कार्यों का नियम विरुद्ध पार्षद निधि से भुगतान।
वार्ड नंबर 07 एसडीएम कार्यालय के बगल एवं तहसील कार्यालय के बगल में बिना टेंडर के 1 साल पूर्व अवैध रूप से पेवर ब्लॉक निर्माण कराए गए कार्यों का फर्जी तरीके से पार्षद निधि से भुगतान।
कमीशनखोरी के चक्कर में बिना टेंडर किए 3 साल से एक ही एजेंसी को प्लेसमेंट ठेका दिया जा रहा है।
वार्ड नंबर 07 में बिना किसी टेंडर एवं अनुमति के शासकीय भूमि पर अवैध रूप से 08 नग शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण करा दिया गया।
गौरव पथ निर्माण के पूर्व ठेकेदार को लगभग 75 लाख की अग्रिम भुगतान
कोर्ट रोड (दिनेश शर्मा घर ) से बांग्लाभाठा पुलिया तक स्वीकृत गौरवपथ के दोनों तरफ पोल शिफ्टिंग एवं ट्रांसफार्मर के कार्य कराया जाना था जिसके लिए लगभग 34 लाख रुपए की डिमांड विद्युत विभाग द्वारा जारी किया था। विद्युत विभाग ने लगभग 1200 मीटर तक ही कार्य कराया गया शेष कार्य पेंडिंग है, किंतु सुशील चौधरी ने कमीशनखोरी के चक्कर में लगभग 27 लाख रुपए भुगतान कर दिया।
वार्ड नंबर 10 में 10 साल पूर्व बने गुणवत्ताहीन सीसी रोड का भुगतान
2 मार्च 2026 “रमेश हार्डवेयर” के नाम पर बिना सामग्री खरीदे फर्जी बिल के आधार पर 14 लाख 71 हजार 122 रुपये का जल प्रदाय सामग्री के नाम पर भुगतान।
इन सभी बिंदुओं को सामने रखते हुए संबंधित पक्षों ने सीएमओ से सवाल किया है कि क्या वे इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देंगे और निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं?
“मीडिया से जिम्मेदारी निभाने की अपील”
अंत में अपील की गई है कि मीडिया बिना सत्यापन के खबरें प्रकाशित न करे। चेतावनी भी दी गई है कि भविष्य में भ्रामक खबरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बिलाईगढ़ का यह मामला अब आरोप-प्रत्यारोप की जंग में उलझता जा रहा है। एक तरफ गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं, तो दूसरी ओर इन्हें साजिश बताकर खारिज किया जा रहा है। ऐसे में अब सबकी निगाहें निष्पक्ष जांच पर टिकी हैं, जिससे सच्चाई सामने आ सके।


















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