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Saturday, April 25, 2020

जिला ~कोंडागांव : दुर्गम गांव पेरमापाल में कलेक्टर की अगुवाई में पहुंचा अधिकारी अमला, निर्माण कार्यो का किया निरीक्षण, सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मनरेगा सहित अन्य निर्माण कार्यो को किया जायेगा शुरु: ग्रामीणों को जल, जंगल, जमीन की अहमियत समझाई कलेक्टर ने

 जिला ~कोंडागांव ( गिरीश जोशी ) : विकासखण्ड कोण्डागांव के अत्यंत दुर्गम इलाके समझे जाने वाले गांव पेरमापाल में विगत् दिनांक 23 अप्रैल को कलेक्टर नीलकंठ टीकाम की अगुवाई में जिले के आला अधिकारियों का अमला ग्रामीणों से रुबरु हुआ। इस मौके पर क्षेत्र के विभिन्न गांव जैसे केजंग, बयानार, रेंगागोंदी, मुंगवाल, नरिहा, आदनार के ग्रामीणों ने अपने-अपने क्षेत्र की समस्याओं से अधिकारियों को अवगत कराया। इस दौरान कलेक्टर ने सर्वप्रथम कोरोना महामारी संक्रमण से बचाव हेतु सावधानी बरतने की अपील करते हुए कहा कि क्योंकि कोण्डागांव जिले को संक्रमण की दृष्टि से ग्रीन जोन में रखा गया है अतः अब ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा सहित अन्य निर्माण कार्यो को पुनः गति दी जावेगी। इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पूरा पालन करते हुए सभी कामगार मास्क, गमछा का प्रयोग करके एवं एक-दूसरे के साथ पर्याप्त दूरी रखते हुए भूमि सुधार, तालाब, सड़क निर्माण जैसे ग्रामीण अधोसंरचनात्मक निर्माण कार्यो को करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि पिछले दो वर्षो में जिला प्रशासन एवं दूरस्थ ग्रामों के बीच विकास का रिश्ता  कायम हुआ है, जिससे क्षेत्रीय परिदृश्य बदल गया। फलस्वरुप अब ग्रामीण स्वंय सामने आकर अपने-अपने क्षेत्र के शिक्षा , स्वास्थ्य, सड़क निर्माण संबंधी मांगो पर खुलकर चर्चा करते है और जिला प्रशासन भी अपनी पूरी क्षमता के साथ ग्रामीणों की समस्याऐं, उनके निदान, युवाओं में क्षमता विकास, सामुहिक नेतृत्व और उनके प्रत्यक्ष भागीदारी को निरंतर प्रोत्साहित कर रहा है।
जल, जंगल एवं जमीन ही है ग्रामीणों की वास्तविक पूंजी

कलेक्टर ने कहा कि स्थानीय समुदाय के लिए जल, जंगल, जमीन ही मूल विकास का आधार है। यही वह पूंजी है जिस पर एक खुशहाल ग्रामीण समाज की नींव तैयार होगी। परन्तु हमें केवल इसकी मालिक की भूमिका नहीं निभानी है बल्कि इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए निरंतर प्रयासरत होना पड़ेगा। तभी हम भावी पीढ़ी को एक सुरक्षित भविष्य दे सकते है। हमारे युवाओं को भी कहीं और पलायन कर रोजगार ढूंढने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि स्थानीय प्रचूर प्राकृतिक संपदा में ही रोजगार के अवसर ढूंढे जा सकते है।
 वनोपज संग्रहण एवं उसके नगद भुगतान से महिला समूहो की आजीविका को मिली नई दिशा 

कलेक्टर ने बताया कि स्थानीय वनोपज संग्रहण के माध्यम से महिला समूहो द्वारा अत्यंत सराहनीय कार्य किया गया है। राज्य शासन द्वारा वनोपज के संग्रहण एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने एवं नगद भुगतान से लाॅक डाउन में भी ग्रामीण क्षेत्र नगदी संकट से बचे हुए है। इसके लिए वन विभाग, राष्ट्रीय आजीविका मिशन (बिहान) एवं उसके महिला समूहो की सक्रिय भागीदारी साधूवाद के पात्र है। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे अपने संग्रहित वनोपज जैसे महुआ, ईमली, करंज, चिरौंजी को बिचैलियो को न बेचकर स्व-सहायता समूह की महिलाओं के पास की विक्रय करे, इससे दोनो पक्ष लाभान्वित होंगे। शिक्षा और पोषण के विषय पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि सर्वप्रथम पालकगण अपने शून्य से 5 वर्ष तक के बच्चों के पोषण पर शुरुवात से ही ध्यान देवे, बच्चों के खान-पान, रहन-सहन पर सतत् निगरानी एवं आंगनबाड़ी नियमित रुप से भेजने पर कुपोषण की समस्या ही नहीं रहेगी। षिक्षा के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रत्येक बच्चें का जन्म सिद्ध अधिकार है। अकसर पालक अपने स्कूल जाने वाले बच्चों को, स्कूल न भेजकर घरेलू कार्यो में लगा देते है यह प्रवृत्ति बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और इसे बदलने की जरुरत है।
इस मौके पर जिले के पुलिस अधीक्षक बालाजी राॅव सोमावार ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस वास्तव में ग्रामीणों की मित्र की भूमिका में है और उनके सुरक्षा के साथ-साथ उनके चहुमुखी विकास में तत्पर रहेगी। यद्यपि कुछ वर्षो पहले कुछ असमाजिक तत्वो के प्रभाव से यह क्षेत्र विकास की धूरी से अलग कर दिया गया था। परन्तु अब ऐसी स्थिति नहीं आयेगी, अब ग्रामीणों के सहयोग से ग्राम पेरमापाल को एक आदर्ष ग्राम का रुप दिया जायेगा।
 विभागो द्वारा दी गई योजनाओं की जानकारी 

इस अवसर पर उपस्थित विभिन्न विभागो के अधिकारियों द्वारा लाॅक डाउन की स्थिति में शासन द्वारा ग्रामीणों को दी जा रही राहत के संबंध में भी विस्तापूर्वक अवगत कराया गया। खाद्य विभाग ने जानकारी दी कि सभी पंचायतो में आगामी दो माह का निःशुुल्क राशन उपलब्ध करा दिया गया है साथ ही आगामी माह में दो किलो चना निः शुल्क दिया जाकर माह जून में 5 रुपये की दर से दो किलो चना राषन दुकानो के माध्यम से दिया जायेगा। इसी प्रकार वन विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय वनोपजो के शासकीय समर्थन मूल्य का ब्यौरा देते हुए जानकारी दी कि वनोपज संग्रहण के इस सीजन में महिला समूहो द्वारा वनोपज खरीदी की जा रही है अतः ग्रामीण अपने वनोपज बिचैलियो के पास न बेचकर महिला समूहो के पास ही विक्रय करे। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी नोवेल कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के बारे में विस्तारपूर्वक बताते हुए सामाजिक अलगाव के महत्व के नियम के पालन करने की सलाह दी गई। इस दौरान कलेक्टर ने उक्त क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल-पुलिया एवं सड़क निर्माण कार्य को भी देखा और समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देष संबंधित अधिकारियों को दिए।
इस दौरान सीईओ जिला पंचायत डी एन कष्यप, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास जी एस सोरी, अनुविभागीय अधिकार वनमंडल एन.आर.खुंटे, मुख्य कार्यपालन अभियंता अरुण शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी वरुण नागेष, उप संचालक कृषि बालसिंग बघेल, सहा. खाद्य अधिकारी शांति ध्रुव, तहसीलदार यू के मानकर सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

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