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Monday, May 25, 2020

टिड्डी दल के आक्रमण की संभावना को देखते हुए कृषकों के लिए जारी की गयी एडवाईज़री बहराइच 24 मई।


प्रदीप वर्मा, रिपोटर : टिड्डी दल के आक्रमण की संभावना को देखते हुए कृषकों के लिए जारी की गयी एडवाईज़री
बहराइच 24 मई। जिला कृषि रक्षा अधिकारी आर.डी. वर्मा ने बताया कि राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा के विभिन्न क्षेत्रो में टिड्डी के प्रकोप के दृृष्टिगत उत्तर प्रदेश के राजस्थान, पंजाब एवं हरियाण से सटे हुए जनपदो में टिड्डी दल के प्रकोप की सम्भावना बढ़ गयी है। पाकिस्तानी टिड्डी दल राजस्थान से मध्य प्रदेश होते हुए बुंदेलखण्ड क्षेत्र एवं आगरा जनपद में प्रवेश कर चुका है। सरकार द्वारा इसके लिए हाईअलर्ट जारी कर दिया गया है। टिड्डी दल के आक्रमण की संभावना को देखते हुए शासन द्वारा सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश में जिलाधिकारी के पर्यवेक्षण में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में उप कृृषि निदेशक, जिला कृृषि अधिकारी एवं जिला कृृषि रक्षा अधिकारी को सदस्य नामित करते हुए टीम बनाई गयी है। यह टीम टिड्डी दल के प्रकोप की निगरानी का कार्य करेगी एवं टिड्डी दल के प्रकोप से सुरक्षा हेतु आवश्यक उपाय एवं रोकथाम हेतु समुचित कार्यवाही करेगी।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने बताया कि टिड्डी दल में करोडांे की संख्या में लगभग दो से ढाई इंच लम्बे कीट होते हंै, जो कुछ ही घण्टांे में फसलों को खा जाते हैं। ये कीट शाम 6 से 8 बजे तक क्षेत्र में आकर जमीन पर बैठ जाते हैं और रात्रि में फसलों को खा जाते हैं। लगभग सभी प्रकार के हरे पत्तांे पर ये कीट आक्रमण करते हैं। इस प्रकार टिड्डी दल का प्रकोप एक प्रकार से महामारी का रूप ले लेता है। अतः यह अत्यन्त आवश्यक है कि टिड्डी दल के आक्रमण की निरन्तर निगरानी की जाए। ताकि प्रकोप की दशा में ससमय टिड्डी दल पर नियन्त्रण पाया जा सके।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों से अपेक्षा की है कि टिड्डी दल के प्रकोप की स्थिति में तत्काल विकास खण्ड में तैनात प्राविधिक सहायक ग्रुप-सी/ग्रुप-बी से सम्पर्क करें। उन्होंने बताया कि उप कृृषि निदेशक बहराइच डाॅ. आर.के. सिंह द्वारा कृृषि विभाग में समस्त क्षेत्रीय कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि अपने-अपने क्षेत्रो में टिड्डी दल के प्रकोप की निगरानी करते रहें और किसान भाईयों को इससे बचाव की जानकारी उपलब्ध करायें। जिससे टिड्डी दल के आक्रमण से बचाव किया जा सके।
श्री वर्मा ने किसानों को सुझाव दिया है कि टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में ढोल, टीन के डब्बों, थालियो आदि को जोर-जोर से बजाते हुए शोर मचायें। शोर से टिड््डी दल आस-पास के खेतों में आक्रमण नहीं कर पायेंगे। चूंकि बसंत का मौसम एवं बलुई मिट्टी टिड्डे के प्रजनन एवं अण्डे देने हेतु सर्वाधिक अनुकूल होता है। इसलिए टिड्डी दल के आक्रमण से सम्भावित ऐसी मिट्टी वाले क्षेत्रों में जुताई करवा दें एवं जल का भराव करा दें। ऐसा करने से टिड्डी दल के विकास की सम्भावना कम हो जाती है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी ने किसानों को यह भी सुझाव दिया है कि टिडडी् दल के न्यून/मध्यम प्रकोप की दशा में किसान भाई क्लोरपायरीफाॅस 20 प्रतिशत ई.सी. का तीव्र छिड़काव करें। इसके अतिरिक्त क्लोरपायरीफाॅस 50 प्रतिशत या क्वीनालफाॅस 25 प्रतिशत या लैम्बडासाय हैलोथ्रिन 5 प्रतिशत या मैलाथियान 50 प्रति ईसी. की 02 मिली. मात्रा 1 लीटर पानी के साथ प्रयोग करें।
कृषकों को यह भी सुझाव दिया गया है कि टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में अविलम्ब जिला कृषि रक्षा अधिकारी के मोबाइल नम्बर 9839206867 पर सम्पर्क कर कीट/रोग के नियन्त्रण के सम्बन्ध में सलाह प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि टिड्डी दल के प्रकोप को देखते हुए जनपद स्तर पर स्थापित किये गये कन्ट्रोल रूम का दूरभाष नम्बर 05252-237020 तथा प्रदेश स्तर पर स्थापित कन्ट्रोल का दूरभाष नमबर 0522-2732063 है। टिड्डी दल के प्रकोप की दशा में कन्ट्रोल रूम के दूरभाष नम्बरों पर सम्पर्क कर उचित सलाह प्राप्त की जा सकती है। श्री वर्मा ने बताया कि कीट/रोग से बचाव हेतु आवश्यक कृृषि रक्षा रसायन जनपद के कृृषि रक्षा इकाईयों पर एवं निजी प्रतिष्ठानों पर उपलब्ध है।

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