Mahendra Sharma Banti Reporter
वर्ष 2019 में आया कोरोनावायरस (कोविड-19) ने अपने प्रकोप से पूरी दुनिया को झकझोर के रख दिया है। इंसान के बाल से 900 गुना सूक्ष्म होता है यह कोरोनावायरस। लेकिन इस छोटे से वायरस में मानव जाति और पूरी दुनिया को अपने सामने घुटने टेकने पर विवश कर दिया है। कोरोनावायरस से जितना डर आज पूरे विश्व में फैल गया है उतना ही एक बहुत बड़ा संदेश भी इस वायरस ने दिया है। लोग केवल इसका भयावह रूप ही देख रहे हैं और वह भी इसलिए देख रहे हैं क्योंकि इस भयावह रूप के जिम्मेदार लोग खुद ही हैं। लोगों की लापरवाही, लोगों का कौतूहल, लोगों की नादानियां और लोगों की ग़लतियाँ ही कोरोनावायरस के प्रकोप का मुख्य कारण हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जो नियमावली जारी की थी, अगर लोगों ने कोरोनावायरस को लेकर उन नियमों का पालन किया होता तो शायद यह प्रकोप या यूं कहें कि यह महामारी इस स्तर पर नहीं होती।
अगर बात करें भारत की तो, भारत की राजनीति के कारण ही कोरोनावायरस देश में आज इस रूप में फैलता जा रहा है। अगर समय रहते भारत सरकार ने अपनी सीमाओं को सील कर दिया होता तो आज यह वायरस इस प्रकार से नहीं फैला होता। कोरोनावायरस के कारण अगर लॉकडाउन को एक सुनिश्चित और सुव्यवस्थित नीतिबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया होता तो आज लाखों की संख्या में लोग इससे प्रभावित नहीं होते। ना ही निर्दोष मज़दूर और फंसे हुए लोग इस तरह त्राहि-त्राहि करते।
लेकिन मेरी राय है कि कोरोनावायरस के कारण हुए लॉकडाउन ने हमें बहुत कुछ दिया भी है। दी है एक सीख, कि हमें कैसे अपने आप को संयमित, सुरक्षित और स्वच्छ रखना है। कैसे हमें पर्यावरण संरक्षण पर पूरा ध्यान देना है। कैसे हमें सिर्फ पैसे के पीछे भागने की बजाय अपने स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना है। कैसे हमें अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को बढ़ाना है। कैसे हमें अपनी व्यस्त दिनचर्या के साथ ही आध्यात्म और अपने परिवार पर भी ध्यान देते हुए उनके साथ समय व्यतीत करना है। कैसे हमें कम से कम संसाधनों के साथ जीवन जीने की आदत डालनी है। कैसे हमें फिजूलखर्ची से बचना है। कैसे हमें एक दूसरे का सहयोग करते हुए सब का सम्मान करना है और कैसे हमें बुरे वक्त में सही और गलत इंसानों की परख करनी है, फिर चाहे वह हमारा कोई रिश्तेदार हो या मित्र हो या कोई राजनेता हो। कैसे हमें अपने मतदान का उचित प्रयोग करना है। कैसे हमें किसी लालच में आए बिना एक शिक्षित और सभ्य व्यक्ति को चुनकर विधानसभा या लोकसभा भेजना है। कैसे हमें प्रदूषण को कम करना है। कैसे हमें पेड़ पौधे और वृक्षों का संरक्षण करना है और कैसे हमें जानवरों की रक्षा व देखभाल करनी है इत्यादि।
प्रकाशपुन्ज पाण्डेय, राजनीतिक विश्लेषक, रायपुर, छत्तीसगढ़
7987394898, 9111777044
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