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Wednesday, July 29, 2020

तानाशाही" या "लोकशाही" में से किसी एक को चुनना होगा, छत्तीसगढ़ की जनता को - चंद्रशेखर शर्मा*

महेंद्र शर्मा डोंगरगढ़ रिपोर्टर
काँग्रेसी चिंतक और समाजसेवी चंद्रशेखर शर्मा ने बड़ी ही बेबाक़ी से छत्तीसगढ़ की तमाम जनता को मीडिया के माध्यम से संदेश देते हुए कहा है कि अब छत्तीसगढ़ की जनता को "तानाशाही" या "लोकशाही" में से किसी एक को चुन लेना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि आज प्रदेश की स्थिति ऐसी ही बनी हुई है। जहाँ एक ओर तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण प्रदेश की राजधानी रायपुर सहित अन्य जिलों में भी लॉकडाउन लागू किया गया है, जिले की ज़िम्मेदारी संबंधित जिलाधिकारी की है, धारा १४४ लगी हुई है, आम लोगों को कड़ाई से सरकारी नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं, और जनता इन नियमों का पालन कर भी रही है, लेकिन वहीं दूसरी ओर इसी आम जनता के द्वारा चुने हुए कुछ प्रतिनिधि, शहर में दौरा करने के नाम पर खुलेआम अपने लावलश्कर के साथ, रायपुर की सड़कों पर दोपहिया वाहनों पर बिना शिरस्त्राण (हेलमेट) लगाए मौसम का आनंद लेते हुए तफरीह मार रहे हैं। न ही इन जनप्रतिनिधियों द्वारा शारीरिक दूरी रखी जा रही है और न ही लॉकडाउन के नियमों का पालन किया जा रहा है।

चंद्रशेखर शर्मा ने कहा कि क्या प्रदेश में नियम कानून को पालन करने की ज़िम्मेदारी और दायित्व केवल जनता की ही है? क्या जनता द्वारा चुने हुए प्रतिनिधि आम से खास बनने के बाद इन नियमों की सीमा से बाहर हो जाते हैं? या क्या प्रदेश का प्रशासन, प्रदेश के शासन के दबाव में काम कर रहा है? यह बात स्पष्ट करनी बहुत जरूरी है कि क्या शासन और प्रशासन जो कि एक दूसरे के पूरक हैं, इनमें किसी प्रकार का मेल भाव या तालमेल है, या फिर प्रशासन और शासन अपनी अपनी मनमानी कर रहे हैं? या फिर दोनों ही अपने कर्तव्य पालन के बजाय केवल खानापूर्ति करने में लगे हुए हैं। अगर प्रशासन और शासन का तालमेल बराबर है तो फिर जो दंडात्मक कार्यवाही आम लोगों पर की जाती है, वही कार्रवाई जनता द्वारा चुने गए इन जनप्रतिनिधियों पर क्यों नहीं की जाती? यही कारण है कि हमारे देश और प्रदेश से कोरोना जैसी बीमारी दूर नहीं जा पा रही है। अगर नियम कानून का पालन सभी ईमानदारी से करें तो यकीनन कोरोनावायरस की ये चेन टूट जाएगी और हम कोरोनावायरस पर जीत हासिल कर लेंगे। लॉकडाउन करने से व्यापार और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंच रहा है, लेकिन कोरोना नहीं थम रहा है। अगर ऐसा होता तो पिछले 8 दिनों से लॉकडाउन के बावजूद राजधानी में रोज़ नए नए आंकड़े सामने नहीं आते और आर्थिक स्थिति को नुकसान पहुंच रहा होता। इसलिए ज़रा विचार कीजिए कि हमसे कहाँ चूक हो रही है और कोरोना वायरस की महामारी के रोकथाम में हम क्यों सफल नहीं हो पा रहे हैं।

 *चंद्रशेखर शर्मा, रायपुर, छत्तीसगढ़*
+919827142452

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