पंंकज शर्मा, रायपुर : महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. खूबचंद बघेल जी के जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्वर्गीय श्री खूबचंद बघेल जी को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉ. बघेल हमारे छत्तीसगढ़ के पुरोधापुरुष है।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने कहा कि डॉ. बघेल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी से प्रभावित थे, वे अपनी शासकीय सेवा से त्यागपत्र देकर 1930 में गांधी जी के आंदोलन में शामिल हो गये, वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, पश्चात संपूर्ण जीवन उन्होंने छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सम्मान के लिए संघर्ष किया, उनके इसी योगदान को दृष्टिगत रखते हुए, उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम स्वप्नदृष्टा कहा जाता है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने कहा कि डॉ. खूबचंद बघेल जी ने छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़ियों के स्वाभिमान को स्वर दिया, हमारी लोक संस्कृति, लोककला और लोक परंपराओं को उन्होंने अपने प्रयासों से राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया, उनके इस योगदान के लिए छत्तीसगढ़ का जन-जन अनंत काल तक कृतज्ञ रहेगा और छत्तीसगढ़ की भावी पीढ़ी के हृदय में उनके प्रति सम्मान का भाव सदैव शाश्वत और जागृत बना रहेगा।
पंंकज शर्मा, रायपुर : महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. खूबचंद बघेल जी के जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत ने स्वर्गीय श्री खूबचंद बघेल जी को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि स्वर्गीय डॉ. बघेल हमारे छत्तीसगढ़ के पुरोधापुरुष है।विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने कहा कि डॉ. बघेल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी से प्रभावित थे, वे अपनी शासकीय सेवा से त्यागपत्र देकर 1930 में गांधी जी के आंदोलन में शामिल हो गये, वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही, पश्चात संपूर्ण जीवन उन्होंने छत्तीसगढ़ की अस्मिता और सम्मान के लिए संघर्ष किया, उनके इसी योगदान को दृष्टिगत रखते हुए, उन्हें छत्तीसगढ़ का प्रथम स्वप्नदृष्टा कहा जाता है। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. महंत ने कहा कि डॉ. खूबचंद बघेल जी ने छत्तीसगढ़, छत्तीसगढ़ी और छत्तीसगढ़ियों के स्वाभिमान को स्वर दिया, हमारी लोक संस्कृति, लोककला और लोक परंपराओं को उन्होंने अपने प्रयासों से राष्ट्रीय पटल पर स्थापित किया, उनके इस योगदान के लिए छत्तीसगढ़ का जन-जन अनंत काल तक कृतज्ञ रहेगा और छत्तीसगढ़ की भावी पीढ़ी के हृदय में उनके प्रति सम्मान का भाव सदैव शाश्वत और जागृत बना रहेगा।


















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