मध्यप्रदेश
।। आवारा गौ वंश से,चौपट हुई गेंहू की फसल, किसान के आगे पूरे बर्ष के लिए खाद्यान्न के संकट , छोड़ी दी खेती।।
विशेष रिपोर्ट। । भीमसेन सिंह तोमर थरा।
जितना स्नेह माता को पुत्र के प्रति होता है, उतना ही , किसान को खेत-खलिहान से,। और अगर इनका मोह हट जाए इनके लिए तो जरूर ही कुछ बहुत ही पीड़ादायक हुआ है।। जी हां मैं बिल्कुल सही कह रहा हूं। कि अभी तक तो मैंने , सिर्फ कहानियां ही एसी सुनी थी और आज देख और सुन भी लिया। जिस प्रकार से मुंशी प्रेमचंद जी की कहानी "" पूस की रात"" में हल्कू अपनी पीड़ा से मुक्ति होने के लिए खेती बाड़ी से संबंध ही तोड़ने का निश्चय कर लेता है ठीक उसी प्रकार की एक आंखों देखी कहानी आज मैं देखीं और स्वयं पीड़ित के मुख से सुनी भी , सुसकियां भरता हुआ पीड़ित किसान ने जब खेती छोड़ने की बात कही तो मेरा भी अंतर्मन बहुत ही दृवित हुआ। और हांथ एक समय के लिए स्थिर हो गए।।"" रमनसिंह" एक , एक दो बीघा के ही किसान है और उन्होंने अपने खेत में गेहूं की फसल बो रखी थी। और उसकी देखभाल एक पुत्र के समान रात में जग-जग कर की थी। और जब आज रात भर जागने के बाद सुबह लगभग पांच बजे पर थोड़े ही समय के लिए आंख लग जाने से पूरे बर्ष के लिए दाने दाने को भी संकट आ जाएगा ऐसा उन्होंने अभी सोचा भी नहीं था।। और जब सुबह आंख खुली तो पैरों से जमीन खिसक गई थी। ।
क्यों कि सारे खेत को आवारा गौ वंश ने नष्ट कर दिया और उसमें बुरी तरह से रोद भी दिया था। रन सिंह का रुंआसे स्वर में बोलना था कि मैं और मेरी धर्मपत्नी रात को बारी बारी से इसकी रखवाली करते थे लेकिन अब मेरी सारी फसल को गौवंश ने चौपट कर दिया अब हम साल भर कैसे गुजारा करेंगे।। और अब हम खेती बाड़ी छोड़ कर मेहनत ,मजदूरी करने की कोशिश करेंगे।। ।।। जब सहयोग की अपेक्षा से हल्के से संबंधित पटवारी को खेत के नुक़सान की पुष्टि और शासन से कुछ सहायता राशि स्वीकृत करने की मांग की ।। तो पटवारी साहब ने फोन भी रिसीव नहीं किया।। ।।। विशेष अनुरोध के लिए और संबंधित को कुछ सहयोग की अपेक्षा से , एस डी एम महोदय जी को भी फोन पर संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने भी फोन रिसीव नहीं किया।।
सी एन आई न्यूज के लिये अम्बाह से ब्यूरो रिपोर्ट ।



















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