दुर्गेश यादव की रिपोर्ट
विद्यार्थियों के लिए कैरियर मार्गदर्शन
सैनिक/सेना-एक ऐसा नाम, जिसे सुनकर सबके मन में देश भक्ति का जज्बा जाग उठता है। एक ऐसा क्षेत्र जिसमें देश की सेवा करने के साथ-2 सुनहरे भविष्य की भी अपार संभावनाएं हैं। कैरियर कौन्सिलिंग एंड गाइडेन्स सेल राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय द्वारा शहीद दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए सेना मेंअवसर पर एक वेबीनार का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मकसद न केवल विद्यार्थियों को सेना में सुनहरे भविष्य के बारे में बताना था बल्कि ऐसे पूर्व सैनिकों का सम्मान भी करना था जिन्होंने कोरोना महामारी के इस आपात काल में निःस्वार्थ भाव से सबकी सेवा की है। इस वेबीनार में कई पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हुए, इनमें से प्रमुख थे- विशिष्ट सेवा मैडल से सम्मानित ग्रुप कैप्टन संजय कुमार पांडेय, कर्नल राकेश सिंह बिसेन एवं सिपाही संस्था के प्रमुख एवं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह राणा। कार्यक्रम में शामिल अतिथि भारतीय सेना द्वारा संचालित कई महत्वपूर्ण ऑपेरशन जैसे- ऑपेरशन पराक्रम, ऑपेरशन विजय, ऑपेरशन रक्षक, ऑपेरशन मेघदूत का हिस्सा रह चुके हैं। कार्यक्रम में सभी अतिथियों ने सेना में अपने लंबे कैरियर के अनुभव साझा किए एवं युवा विद्यार्थियों को सेना में प्रवेश के लिए विशेष सुझाव एवं मार्गदर्शन दिया। युवाओं ने सेना में भर्ती से संबंधित अपनी बहुत सारी जिज्ञासाएं इस पूर्व सैन्य अधिकारियों के सामने रखी, और उन्होंने बहुत ही अच्छे से विद्यार्थियों की जिज्ञासा को शांत किया। कार्यक्रम के अगले चरण में श्री ऋषभ शिक्षण समिति एवं श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय द्वारा आमंत्रित अतिथियों के साथ-2 पूर्व सैनिकों की छत्तीसगढ़ में सबसे सक्रिय संस्था सिपाही और उनके 113 सदस्यों का प्रशस्ति पत्र से सम्मान किया गया। आपको ज्ञात हो कि सिपाही एक ऐसी संस्था है, जिसमें भारतीय सेना के तीनों अंग (जल सेना, थल सेना और वायु सेना) के पूर्व सैनिक और शहीदों के परिवार के लोग इसके सदस्य हैं। यह संस्था केवल भारतीय सेना ही नहीं बल्कि सभी यूनिफॉर्म सर्विसेस जैसे- पुलिस, सीआरपीएफ, आसाम पुलिस एवं उनके परिवार के हितों के लिए काम करती है। यह संस्था कहीं से कोई चौरिटी नहीं लेती है।
कोरोना आपातकाल और लॉक डाउन के समय इस संस्था के 113 पूर्व सैनिकों ने 70 दिनों तक निःस्वार्थ भावसे बिना किसी वेतन और बिना किसी बीमा के जनसेवा की है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा भी संस्था कीप्रशंसा की जा चुकी है।
श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय मे शहीद दिवस पर पूर्व सैनिकों का सम्म्मान एवं विद्यार्थियों के लिए कैरियर मार्गदर्शन सैनिक/सेना-एक ऐसा नाम, जिसे सुनकर सबके मन में देशभक्ति का जज्बा जाग उठता है। एक ऐसा क्षेत्र जिसमें देश की सेवा करने के साथ-2 सुनहरे भविष्य की भी अपार संभावनाएं हैं। कैरियर कौन्सिलिंग एंड गाइडेन्स सेल राष्ट्रीय सेवा योजना प्रकोष्ठ श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय द्वारा शहीद दिवस के अवसर पर विद्यार्थियों के लिए सेना में अवसर पर एक वेबीनार का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मकसद न
केवल विद्यार्थियों को सेना में सुनहरे भविष्य के बारे में बताना था बल्कि ऐसे पूर्व सैनिकों का सम्मान भी करना था जिन्होंने कोरोना महामारी के इस आपात काल में निःस्वार्थ भाव से सबकी सेवा की है। इस वेबीनार में कई पूर्व सैन्य अधिकारी शामिल हुए, इनमें से प्रमुख थे- विशिष्ट सेवा मैडल से सम्मानित ग्रुप कैप्टन संजय कुमार पांडेय, कर्नल राकेश सिंह बिसेन एवं सिपाही संस्था के प्रमुख एवं प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह राणा। कार्यक्रम में शामिल अतिथि भारतीय सेना द्वारा संचालित कई महत्वपूर्ण ऑपेरशन जैसे- ऑपेरशन पराक्रम, ऑपेरशन विजय, ऑपेरशन रक्षक, ऑपेरशन मेघदूत का हिस्सा रह चुके हैं। कार्यक्रम में सभी
अतिथियों ने सेना में अपने लंबे कैरियर के अनुभव साझा किए एवं युवा विद्यार्थियों को सेना में प्रवेश के लिए विशेष सुझाव एवं मार्गदर्शन दिया। युवाओं ने सेना में भर्ती से संबंधित अपनी बहुत सारी जिज्ञासाएं इस पूर्व सैन्य अधिकारियों के सामने रखी, और उन्होंने बहुत ही अच्छे से विद्यार्थियों की जिज्ञासा को शांत किया। कार्यक्रम के अगले चरण में श्री ऋषभ शिक्षण समिति एवं श्री ऋषभ विद्योदय महाविद्यालय द्वारा आमंत्रित अतिथियों के साथ-2 पूर्व सैनिकों की छत्तीसगढ़ में सबसे सक्रिय संस्था सिपाही और उनके 113 सदस्यों का प्रशस्ति पत्र से सम्मान किया गया। आपको ज्ञात हो कि सिपाही एक ऐसी संस्था है, जिसमें भारतीय सेना के तीनों अंग (जल सेना, थल सेना और वायु सेना) के पूर्व सैनिक और शहीदों के परिवार के लोग इसके सदस्य हैं। यह संस्था केवल भारतीय सेना ही नहीं बल्कि सभी यूनिफॉर्म सर्विसेस जैसे- पुलिस, सीआरपीएफ, आसाम पुलिस एवं उनके परिवार के हितों के लिए काम करती है। यह संस्था कहीं से कोई चौरिटी नहीं लेती है।
कोरोना आपातकाल और लॉक डाउन के समय इस संस्था के 113 पूर्व सैनिकों ने 70 दिनों तक निःस्वार्थ भाव से बिना किसी वेतन और बिना किसी बीमा के जनसेवा की है। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल द्वारा भी संस्था की प्रशंसा की जा चुकी हैहै




















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