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Wednesday, January 6, 2021

भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मन के विकार दुर हो जाते है -- साध्वी रूपम राघव

गुण्डरदेही । भाठागांव आर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ  सप्ताह के पांचवे दिन साध्वी रूपम राघव जी ने श्रीकृष्ण की बाल लीला का मनोहारी वर्णन किया। श्रीकृष्ण के बाल लीला का वर्णन सुनकर एवं झांकी देखकर उपस्थित श्रोतागण मंत्रमुग्ध होकर झूमने लगे। कथा वाचिका साध्वी जी ने कहा कि भागवत कथा के श्रवण मात्र से ही मन के विकार दूर हो जाते हैं। समर्पण भाव से ही प्रभु मिलते हैं । भागवत कथा समस्त वेद वेदांगों का सार है। यह वेद रूपी कल्पवृक्ष का मधुर पके हुए फल के समान है। कथा वाचिका ने कहा कि सभी वेद वेदांग उपनिषद पुराण  धर्म शास्त्रों का निचोड़ सार इसी में निहित है। भागवत कथा के मर्म को समझने के बाद कुछ भी समझना शेष नहीं रह जाता है। श्रीमद भागवत कथा का प्रादुर्भाव चतुश्लोकी भागवत के रूप में भगवान श्रीमन्ननारायण से हुआ। यह ज्ञान नारायण के द्वारा ब्रह्माजी को प्राप्त हुआ। ब्रह्माजी के द्वारा नारद जी को एवं नारद जी के द्वारा व्यास जी को प्राप्त हुआ है। व्यास जी के द्वारा चतुश्लोकी भागवत को 18 हजार श्लोकों में व्याख्या करके इस दिव्य ज्ञान को सुकदेव जी को प्रदान किया गया। सुकदेव जी के द्वारा राजा परीक्षित को सुनाया गया। जिसके माध्यम से यह हम सभी को प्राप्त है। कलयुग में यह कथा मुक्ति प्रदायिनी है। कथा व्यास ने श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान कराते हुए अवतार प्रसंग पर चर्चा किया। कथा व्यास मे अन्य प्रसंग पर विस्तार पूर्वक चर्चा किया। कथा वाचिका ने ब्रज में नंदोत्सव नंद-वासुदेव संवाद  ब्रज में इंद्र की पूजा बंद कराकर भगवान गोवर्धन नायक की पूजा प्रारंभ करना एक रूप में कृष्ण व दूसरे रूप में गोवर्धन बनकर पूजन कराना ब्रज में मूसलधार बारिश करके ब्रज को जलमग्न करने की चेष्टा करना  भगवान द्वारा गोवर्धन पर्वत को ब्रज वासियों की रक्षार्थ कनिष्ठिका उंगली पर धारण कर सभी गोपियों की रक्षा करना सहित अन्य प्रसंग की व्याख्या व झांकी प्रदर्शित किया गया। कथा वाचिका ने भगवान की बाल लीला माखन चोरी मटकी फोड़ लीला झांकी के माध्यम से प्रस्तुति की। साध्वी जी ने बताया कि भगवान ने गोवर्धन पर्वत को 7 वर्ष की आयु में 7 दिन व रात अपनी उंगली पर धारण किया। इंद्र को जब अपने अपराध के बारे में ज्ञात हुआ तब इंद्र स्तुति करने ब्रज में आते हैं। भगवान कृष्ण इंद्र को क्षमा कर देते हैं। भगवान ने इंद्र को इसलिए क्षमा किया कि उन्होंने सभी गोपियों को भगवान का सानिध्य प्रदान करवाया था। कथा श्रवण करने बलराम कतलम  संध्या कतलम भगवान सिंह   लेखराम साहू  कृष्ण कुमार  डीलेश्वर अश्वनी यदु पुनारद साहू गजेन्द्र यदु  बलदाऊ  हिलेश्वर यमलेश  गिरिधर  गंगाप्रसाद  शकुन्तला सहित आसपास गांव के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे ।


सी एन आई न्यूज के लिए गुण्डरदेही से भानु साहू की रिपोर्ट

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