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Wednesday, January 6, 2021

सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को मिली सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी

 



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट 


नई दिल्ली -  सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी है। जस्टिस एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली एक पीठ फैसला सुनाया। इसके साथ ही नये संसद भवन के निर्माण का रास्ता भी अब साफ हो गया है। इसमें संसद की नई इमारत भी शामिल है। जस्टिस एएम खनविलकर , जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस संजीव खन्ना तीन जजों की बेंच ने 2-1 के बहुमत से यह फ़ैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय से भविष्य की परियोजवनाओं में स्मॉग टावर लगाने के लिये कहा है ,  ख़ास करके उन शहरों में जहाँ प्रदूषण गंभीर मसला है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट में पर्यावरण से जुड़ी मंज़ूरियों को भी स्वीकार कर लिया है और ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव की अधिसूचना को भी हरी झंडी दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यह प्रोजेक्ट डीडीए एक्ट के तहत वैध है। कोर्ट ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय द्वारा पर्यावरण मंजूरी की सिफारिशें उचित हैं और हम इसे बरकरार रखते हैं। साथ ही अदालत ने परियोजना समर्थकों को समिति से अनुमोदन प्राप्त करने का निर्देश दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू करने के लिए हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी की मंजूरी आवश्यक है। सेंट्रल दिल्ली को एक नई शक्ल देने वाले इस प्रोजेक्ट के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकायें दी गयी थीं। जिनमें लुटियंस ज़ोन में निर्माण का विरोध करते हुये कई तरह के नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगाये गये थे। इन आरोपों में चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ और पर्यावरण संबंधी चिंतायें भी शामिल थीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 07 दिसंबर को नये संसद भवन के लिये 10 दिसंबर को आधारशिला की अनुमति दी थी, लेकिन इसके साथ में यह भी निर्देश दिया था कि कोई निर्माण नहीं होगा। न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की अध्यक्षता वाली की पीठ ने कहा था कि केंद्र सरकार सेंट्रल विस्टा परियोजना की आधारशिला रख सकती है, लेकिन इसके लिये कोई निर्माण, विध्वंस या पेड़ों की कटाई नहीं होगी। सरकार की ओर से भी आश्वासन दिया गया था कि लंबित याचिकाओं पर फैसला आने से पहले वहां पर निर्माण या विध्वंस का कोई कार्य नहीं होगा। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 10 दिसंबर को नए संसद भवन के निर्माण के लिये आधारशिला रखी और ‘भूमि पूजन’ किया, जो बीस हजाइ करोड़ रुपये की सेंट्रल विस्टा परियोजना का एक हिस्सा है। इस पीठ में जस्टिस दिनेश महेश्वरी और संजीव खन्ना भी शामिल हैं। मामले में कोर्ट ने पिछले साल पांच नवंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया था कि परियोजना पैसों की बचत होगी। इश प्रोजेक्ट से सालाना 20 हजार करोड़ की बजत होगी, जिसका भुगतान केंद्र सरकार के मंत्रालयों के लिये किराये के रूप में किया जाता है। इसने यह भी कहा था कि नए संसद भवन के निर्माण का निर्णय जल्दबाजी में नहीं लिया गया है और परियोजना के लिये किसी भी तरीके से किसी कानून या मानदंडों का उल्लंघन नहीं किया गया है।

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