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Thursday, March 25, 2021

भागवत में श्रीकृष्ण और रुखमणी विवाह के प्रसंग पर पंडाल में श्रद्धालुओं ने बरसाए फूल



गुण्डरदेही । ग्राम हल्दी में चल रहे श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन बुधवार को श्रीकृष्ण रुखमणी विवाह का आयोजन हुआ । जिसे बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। श्रीमद भागवत कथा के सातवें दिन कथावाचक आचार्य श्री हरिशरण जी महराज कनेरी वाले ने रास पंच अध्याय का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि महारास में पांच अध्याय है। उनमें गाए जाने वाले पंच गीत भागवत के पंच प्राण है। जो भी ठाकुर जी के इन पांच गीतों को भाव से गाता है उसका भव पार हो जाता है। उन्हें वृंदावन की भक्ति सहज प्राप्त हो जाती है। कथा में भगवान का मथुरा प्रस्थान कंस का वध महर्षि संदीपनी के आश्रम में विद्या ग्रहण करना कालयवन का वध  उधव गोपी संवाद उधव द्वारा गोपियों को अपना गुरु बनाना द्वारिका की स्थापना एवं रुखमणी विवाह के प्रसंग का संगीतमय भावपूर्ण पाठ किया गया। बड़ी संख्या में भक्तगण दर्शन हेतु शामिल हुए। कथा के दौरान महराज ने कहा कि महारास में भगवान श्रीकृष्ण ने बांसुरी बजाकर गोपियों का आह्वान किया और महारास लीला द्वारा ही जीवात्मा परमात्मा का ही मिलन हुआ। उन्होंने कहा कि भगवान कृष्ण ने 16 हजार कन्याओं से विवाह कर उनके साथ सुखमय जीवन बिताया भगवान श्रीकृष्ण रुकमणी के विवाह की झांकी ने सभी को खूब आनंदित किया । भागवत कथा के सातवें दिन कथा स्थल पर रूखमणी विवाह के आयोजन ने श्रद्धालुओं को झूमने पर मजबूर कर दिया। श्रीकृष्ण रुकमणी की वरमाला पर जमकर फूलों की बरसात हुई। कथावाचक श्री हरिशरण महराज ने भागवत कथा के महत्व को बताते हुए कहा कि जो भक्त प्रेमी कृष्ण रुक्मणी के विवाह उत्सव में शामिल होते हैं उनकी वैवाहिक समस्या हमेशा के लिए समाप्त होती है! जीव परमात्मा का अंश है इसलिए जीव के अंदर अपारशक्ति रहती है यदि कोई कमी रहती है वह मात्र संकल्प की होती है संकल्प एवं कपट रहित होने से प्रभु उसे निश्चित रूप से पूरा करेंगे उन्होंने महारास लीला श्री उद्धव चरित्र श्री कृष्ण मथुरा गमन और श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर विस्तृत विवरण दिया श्री रुक्मणी विवाह महोत्सव प्रसंग पर व्याख्यान करते हुए उन्होंने कहा कि रुखमणी के भाई रुकमि ने उनका विवाह शिशुपाल के साथ सुनिश्चित किया था लेकिन रुक्मणी ने संकल्प लिया था कि वह शिशुपाल को नहीं केवल गोपाल को पति के रूप में वरण करेंगे उन्होंने कहा शिशुपाल असत्य मार्गी है और द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण सत्य मार्गी है ! कथा के दौरान ग्रामीण अध्यक्ष टीका राम सावरे सरपंच खोमेश दामले हरदेव सार्वा कृष्णा लाल यादव  उपसरपंच दुर्गा प्रसाद सिन्हा दीपक गजेन्द्र महेन्द्र साहू  ओंकार सिन्हा कमलेश सिन्हा सहित कई श्रद्धालू उपस्थित थे !




सी एन आई न्यूज के लिए गुण्डरदेही से भानु साहू की रिपोर्ट

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