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Thursday, April 15, 2021

क्या सरकार के पास लॉकडाउन के अलावा दूसरा विकल्प नही?शिवशंकर पाण्डेय समाजसेवी शिवशंकर पाण्डेय ने


 क्या सरकार के पास लॉकडाउन के अलावा दूसरा विकल्प नही?शिवशंकर पाण्डेय

समाजसेवी शिवशंकर पाण्डेय ने कोरोना वायरस महामारी के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए लॉकडाउन के स्थान पर दूसरे विकल्पों को आजमाने का आग्रह किया है। जिसकी मांग पूरा देश कर रहा है।कुछ नियम सख्ती से लागू किया जाय तो आर्थिक नुकसान और कोविड के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है।जैसे कि बिना मास्क पहने लोगो पर सख्ती से कार्यवाही, दुकानदारों को कोरोना गॉइडलाइन्स के नियमों को पालन करने के लिये सख्त नियम, कोरोना वायरस की रोकथाम करने वाली वस्तुओं का न्यूनतम दाम रखना,सरकारी कार्यालय में बिना मास्क के प्रवेश पर रोक आदि सख्त नियम बनाकर आर्थिक नुकसान और कोरोना वायरस से बचा जा सकता है।मार्च 2020 में भी कोरोना वायरस के चलते लंबा लॉकडाउन लगाया गया था पर नतीजा आज सबके सामने है देश फिर से लॉकडाउन के तरफ बढ़ रहा है।2020 के लॉकडाउन से देश अभी उभरा भी नही था कि पुनः लॉक डाउन लगा दिया गया बिना कुछ सोचे समझे।क्या 2020 के लॉकडाउन से सरकार ने कोई सबक नही लिया जो एक साल बाद फिर से लॉक डाउन लगा दिया।क्या उन गरीबो के बारे में कभी सोचा जो रोजाना मेहनत मजदूरी कर 100,200 कमाते है।जैसे कि हाथ ठेला खींचकर कमाने वाला,पान ठेला वाला,सब्जी बेचने वाले, मेहनत मजदूरी करने वाले,रिक्शा चलाने वाले, न्यूज़ पेपर हाँकर, टोकनी में चना मुर्रा रखकर बेचने वाली बुजुर्ग महिला, छोटी सी किराना दुकान या अन्य सामान की दुकान  चलाने वाले लोग अपना घर परिवार कैसे चलाएंगे?लॉक डाउन के नाम पर बड़े व्यापारी लूट मचाये है सो अलग।गरीब आदमी आज बहुत ज्यादा परेशान है।महंगाई इतनी ज्यादा है कि परिवार चलाना मुश्किल है।आज के समय की सबसे जरूरी वस्तु मास्क और सेनेटाइजर है जो कि महंगे दामो पर मिल रहा है।दो रूपये में मिलने वाला मास्क दस रुपये में मिल रहा है,25 रुपया में मिलने वाला सेनेटाइजर 100 रुपया में मिल रहा है,सीधे सीधे गरीबो को लूटा जा रहा है जिस पर कार्यवाही के नाम पर प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।रात्रि कर्फ्यू और लॉक डाउन का क्या फायदा निकला?देखा जाय तो कुछ भी नही।10 दिन पहले रात्रि कर्फ्यू लगा दिया गया था उसके बाद भी कोरोना ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया जो आज सबके सामने है।उच्चाधिकारियों को सबसे सरल उपाय है लॉकडाउन का,लॉक डाउन लगाओ और चैन से घर या कार्यालय में बैठे रहो,बाहर क्या हो रहा है उससे मतलब नही है लॉकडाउन तो लगा ही है।यह तो सिर्फ शहरों का आंकड़ा है सोचो अगर 50 प्रतिशत आबादी जो गांवो में निवास करती है उन तक कोरोना वायरस पहुंच गया तो क्या होगा?शहर की अपेक्षा गांवो में नाममात्र का है कोरोना वायरस।लॉकडाउन लगाकर 100,200 रुपये कमाने वाले गरीब मजदूरों के पेट पर लात मार रही है शासन प्रशासन।कड़े नियमो के साथ छोटे बड़े दुकानदारो को दिन में 4 घंटे व्यापर करने की अनुमति दी जाय जिससे कालाबाजारी के साथ साथ आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।2020 के लॉकडाउन के नुकसान से देश उभरने के लिए अभी संघर्ष कर ही रहा था कि दूसरा लॉकडाउन देश पर थोप दिया गया जो अनुचित था।एक तरफ कोविड मामलों में वृद्धि को रोकने के लिए प्रभावी कदमो की आवश्कता है तो दूसरी तरफ आर्थिक गतिविधियों को भी सख्त तरीके से कोविड सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते चलने देना चाहिए।

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