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Wednesday, April 21, 2021

खेतों में गरीबी नही अमीरी उगाए, रोए नही हंसे और मुस्कराए, अश्वगंधा की खेती कम जमीन में फायदेमंद

 



 देव यादव  एन आई न्यूज़ बेमेतरा

बेमेतरा नवागढ़ वर्तमान समय में पारंपरिक खेती में हो रहे नुकसान को देखते हुए युवा किसान किशोर राजपूत ने अश्वगंधा की खेती किया जो  काफी महत्वपूर्ण साबित रहा।


क्या है अश्वगंधा




अश्वगंधा एक औषधि है। इसे बलवर्धक, स्फूर्तिदायक, स्मरणशक्ति वर्धक, तनाव रोधी, कैंसररोधी माना जाता है। इसकी जड़, पत्ती, फल और बीज औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है।


उपयुक्त जलवायु



अच्छे जल निकास वाली बलुई, दोमट मिट्टी या हल्की लाल मृदा, जिसका पीएच मान 7.5 से 8 हो, प्रयुक्त मानी जाती है।


बीज की मात्रा


नर्सरी के लिए प्रति एकड़ तीन किलोग्राम व छिड़काव के लिए  5 से 6 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। बोआई के लिए जुलाई से सितंबर तक का समय उपयुक्त माना जाता है।



बीज शोधन


बीज को गौ मूत्र से उपचारित करते हैं। एक किलोग्राम बीज को शोधित करने के लिए 1लीटर गौ मूत्र को 15लीटर पानी मिलकर उपचारित किया जाता है ।


रोपण की विधि


रोपाई के समय इस बात का ध्यान रखें कि दो पौधों के बीच 8 से 10 सेमी की दूरी हो तथा पंक्तियों के बीच 20 से 25 सेमी की दूरी हो। बीज एक सेमी से ज्यादा गहराई पर न बोएं।


उर्वरक का प्रयोग


बोआई से एक माह पूर्व प्रति हेक्टेअर पांच ट्रॉली गोबर की खाद या कंपोस्ट की खाद खेत में मिलाएं। बोआई के समय 15 किग्रा नत्रजन व 15 किग्रा फास्फोरस का छिड़काव करें।


प्रजाति एवं सिंचाई


डब्लू.एस-20 (जवाहर) अश्वगंधा की अच्छी प्रजातियां हैं। नियमित समय से वर्षा होने पर फसल की सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती। आवश्यकता पड़ने पर जीवन रक्षक सिंचाई अवश्य करें।


छटाई व निराई


बोई गई फसल को 25 से 30 दिन बाद हाथ से छांट देना चाहिए। इससे लगभग 60 पौधे प्रतिवर्ग मीटर यानी 2 लाख पौधे प्रति एकड़ अनुरक्षित हो जाते हैं।


फसल सुरक्षा


अश्वगंधा पर रोग व कीटों का विशेष प्रभाव नहीं पड़ता। कभी-कभी माहू कीट तथा पूर्णझुलसा रोग से फसल प्रभावित होती है। ऐसी परिस्थिति में रोगानुसार दवाई का पानी की दर से घोल बनाकर बोआई के 30 दिन के अंदर छिड़काव करें। आवश्यकता पड़ने पर 15 दिन के अंदर दोबारा छिड़काव करें।


उत्पादन


फसल बोआई के 150 से 170 दिन में तैयार हो जाती है। पत्तियों का सूखना फलों का लाभ होना फसल की परिपक्वता का प्रमाण है। परिपक्व पौधे को उखाड़कर जड़ों को गुच्छे से दो सेमी ऊपर से काट लें फिर इन्हें सुखाएं। फल को तोड़कर बीज को निकाल लें।


क्या है लाभ


अश्वगंधा की फसल से प्रति एकड़  312 किलो जड़ 30  किग्रा बीज प्राप्त हुआ है  जड़ 320 रुपये प्रति किलो में बिक्री हुआ कुल 99840 जड़ से लाभ मिला  इस फसल में लागत से तीन गुना अधिक लाभ होता है।


सी एन आई न्यूज़ बेमेतरा छत्तीसगढ़ देव यादव 9098647395

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