अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर -- चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा वर्ष प्रतिपदा आज से नव संवत्सर का शुभारंभ हो रहा है भारतीय नव वर्ष हम समस्त सनातन धर्मावलंबियों के लिये गर्व का विषय है आज के दिन से ही श्रीब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि का शुभारंभ हुआ , भारत के महान क्रांतिकारी राजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत का शुभारंभ किया उस परंपरा में 2078 वां वर्ष संवत्सर का प्रारंभ हो रहा है। समग्र हिंदू समाज इस नववर्ष का उत्साह पूर्वक स्वागत करते हुए मां भगवती महामाया की आराधना करते हैं एवं तल्लीन होकर सुख शांति समृद्धि एवं परस्पर प्रेम की कामना करते हैं , इसी भावना के साथ प्रत्येक घरों के सामने दीप जलाकर मंगल कलश रख कर , शंख - घंटी बजाते हुये , सनातन वैदिक परंपरा से तोरण ध्वजा फहरातये हुये उत्सव मनाया जाता है, जैसा कि पूज्यपाद पुरी पीठाधीश्वर श्रीमद्जगद्गुरु शंकराचार्य भगवान प्रेरणा देते हैं कि इस शुभ अवसर पर प्रत्येक सनातनी को चाहिये कि वह अपने अपने घरों में सनातन धर्म के प्रतीक चिन्ह स्वस्तिक चिन्ह युक्त केसरिया ध्वज फहरायें तथा परस्पर नववर्ष की शुभकामनाएं प्रेषित करें जिससे बच्चों को ,युवा पीढ़ी को अपने आदर्श भारतीय संस्कृति परंपराओं का ज्ञान हो उसके प्रति आस्था बढ़े। हिन्दू नये वर्ष में नया पंचांग का पूजन कर उसके अवलोकन की परंपरा हो जिससे सभी हिंदू परिवार में जन्म दिन बच्चों का स्वयं का अपने जन्मदिन तिथि में ही मनाने की परंपरा हो, विवाह आदि की वर्षगांठ भी हम तिथि के अनुसार हिंदू महिना के अनुसार मनाने की परंपरा चलावे क्योंकि तिथि के अनुसार ही चंद्रग्रहण , सूर्यग्रहण का योग बनता है , ना कि अंग्रेजी तारीख के अनुसार । वैज्ञानिक भी इस बात को मानते हैं कि समुद्र में जो ज्वार भाटा का योग बनता है वह तिथि के अनुसार ही बनता है । भगवान की जयंती पर्व तिथि के अनुसार ही हम मनाते हैं कृष्ण जन्माष्टमी, रामनवमी पर्व इसलिए भी जन्मतिथि के अनुसार ही वर्षगांठ मनाए , ठीक इसी प्रकार पुण्यतिथि तारीख के अनुसार नहीं हिंदी पंचांग के अनुसार तिथि में ही मनाने से ब्रह्मलीन जीव को उत्तम लोक की प्राप्ति संभव है। ध्यान रहे पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण से जो विकृति आई है उसे रोकने हेतु सनातन संस्कृति का प्रचार दार्शनिक ,वैज्ञानिक और व्यावहारिक धरातल पर कटिबद्ध होकर आस्था पूर्वक संगठित होकर करने की आवश्यकता है। हिंदू नव वर्ष एवं वासंत नवरात्र पर्व की हार्दिक बधाई देते हुये पुरी शंकराचार्य द्वारा संस्थापित संगठन धर्मसंघ पीठपरिषद , आदित्य वाहिनी-आनन्द वाहिनी छत्तीसगढ़ इकाई से आचार्य झम्मन शास्त्री जी ने प्रेषित की है ।


















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