अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली - देश के कई राज्यों में चल रहे चुनाव के बीच केंद्र सरकार ने भारत के नये मुख्य निर्वाचन आयुक्त के नाम पर मुहर लगा दी है। श्री सुशील चंद्रा देश के अगले मुख्य निर्वाचन आयुक्त होंगे ,जो कल 13 अप्रैल को अपना नया पदभार संभालेंगे। मौजूदा मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट की तरह सबसे वरिष्ठ आयुक्त को ही मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त करने की परंपरा रही है।उसी परंपरा के अनुरूप ही "निर्वाचन सदन" में इस शीर्ष पद के लिये सुशील चंद्रा के नाम को मंजूरी दी गई है। इनको लोकसभा चनावों से पहले 14 फरवरी 2019 को निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया गया था , अब ये 14 मई 2022 तक इस पद पर बने रहेंगे।
कौन है सुशील चंद्रा
सुशील चंद्रा का जन्म 15 मई 1957 को हुआ। ये 1980 बैच के आईआरएस अधिकारी हैं। इनकी शिक्षा की बात करें तो ये एक आईआईटीयन के साथ साथ कानून के जानकार भी हैं। इन्होंने आईआईटी रूड़की से बी टैक की पढ़ाई की है वहीं देहरादून के डीएवी कालेज से एलएलबी भी की है।
लंबा और समृद्ध अनुभव हासिल
आईआरएस अधिकारी के तौर पर इन्होंने उत्तरप्रदेश , गुजरात , महाराष्ट्र आदि राज्यों में अपनी सेवायें दी है। अंतर्राष्ट्रीय टैक्सेशन और इन्वेस्टिगशन के क्षेत्र में इन्होंने बड़े पैमाने पर काम किया है। मुंबई में निदेशक और गुजरात में महानिदेशक (जांच) रहते हुये उन्होंने समृद्ध अनुभव हासिल किया है। इसके अलावा उन्होंगे आईआईएम बेंगलुरु , सिंगापुर , व्हार्टन आदि जगहों में विभिन्न तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में ट्रेनिंग ली है। चुनाव आयोग में शामिल होने से पहले सुशील चंद्रा टैक्सेशन नियामक सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) यानी केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के अध्यक्ष रहे हैं। टीएस कृष्णमूर्ति के बाद ये दूसरे ऐसे आईआरएस अफसर हैं , जिन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया। बता दें कि कृष्णमूर्ति को 2004 में मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था।
सबसे बड़ी जिम्मेदारी
आपको बता दें कि बता दें सुशील चंद्रा के मुख्य निर्वाचन आयुक्त बनने के बाद उन पर जो सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी, वो होगी अगले वर्ष यानी 2022 में होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों को आयोजित करवाना। अगले वर्ष पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव होना है। इनमें सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है। इसके अलावा पंजाब, गोवा, उत्तराखंड और मणिपुर भी प्रमुख रूप से शामिल हैं। यूपी को छोड़कर सभी राज्यों में मार्च में कार्यकाल खत्म हो रहा है, जबकि यूपी में 14 मई को योगी सरकार का कार्यकाल खत्म होगा।


















No comments:
Post a Comment
Please do not enter any spam link in the comment box.