महासमुंद/पिथौरा 09 जुलाई 2021/विश्व में सबसे बड़े गुरू मां होती उसके बाद जो उसके नैतिक बूध्दी को विकसित कर घर, समाज एवं विश्व जागृति में रहने योग्य बनाया जाता है, वह है एक गुरु । जो उसके बौध्दिक ज्ञान को विकसित करता है । पुरे विश्व जगत में केवल मात्र दो व्यक्ति ऐसे हैं जो अपने से आगे बढ़ते देखना चाहते है ,पहला माता पिता एवं दुसरा गुरू होता है, जो अपने विद्यार्थी को आगे बढ़ने पर गर्व महसूस करते है। वैसे ही एक वाक्या है कि एक आचार्य (गुरु)की जमा पूंजी उसका शिष्य होता।
एक आचार्य अपने शिष्य को शिक्षा के साथ-साथ संस्कार, जीवन जीने की कला यह सब सिखाता है। यही शिक्षा और संस्कार एक शिष्य के लिए अमूल्य धरोहर होता है।
मैं आपको एक सच्ची घटना से वाकिफ करा दूं कि कोरोना महामारी के चलते बहुत से निजी विद्यालय बंद हो गए और जो गुरु उस विद्यालय के भरोसे में थे, अब वह पूर्ण रुप से बेरोजगार हो चुके थे, कई आचार्य गुरु अपना निजी व्यवसाय में लग चुके थे। एक आचार्य गुरु ने एक छोटा सा व्यवसाय खोला कुछ शिष्यों की दृष्टि अपने गुरु पर पड़ी वे भावुक हो गए, वे आपस में चर्चा करके यह निर्णय लिया कि, हमें अपने आचार्य गुरु की सहायता करनी चाहिए और उन्होंने उनकी जहा तक हो सके सहायता की।
यह बात भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है, गुरु शिष्य का संबंध ना केवल विद्यालय तक सीमित है बल्कि उसके पूरे जीवन तक यह सीमित है, हर गुरु को अपने शिष्य पर गर्व होता है। गुरू ने हि तो शिष्य को यह शिक्षा दी है कि, वह जीवन पर्यंत दूसरों की सहायता करें।
यह लेख गुरु ने अपने शिष्य के लिए भेजी है। वास्तविकता वही है कि आप अपने सद्विचारों साथ दूसरे को भी आगे बढ़ाने में सहायक हो। अंततः गुरु ने कहा कि मेरा पुरा जीवन धन्य हो गया कि, मैंने अपने शिष्यों को जो ज्ञान दिया उससे कहीं ज्यादा उन्होंने ध्यान पुर्वक अर्जित कर सहायता एवं सहयोग कि भावना का पाठ अवलोकन किया।
यह केवल मात्र समाचार नही है, बल्कि एक गुरु द्वारा भेजे गए उसके जीवन में उतार चढाव के पल को साझा किया है।


















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