अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
नई दिल्ली -- आज देश , डिजिटल गवर्नेंस को एक नया आयाम दे रहा है , ई-रूपी वाउचर देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन और डीबीटी को बढ़ावा देने में भूमिका निभायेगा , इससे सभी लोगों को टार्गेटेड , पारदर्शी और लीकेज-फ्री डिलीवरी में मदद मिलेगी। सरकार ही नहीं बल्कि अगर कोई सामान्य संस्था या संगठन किसी के इलाज में , किसी की पढ़ाई में या दूसरे काम के लिये कोई मदद करना चाहता है तो वो कैश के बजाए ई-रूपी दे पायेगा। इससे सुनिश्चित होगा कि उसके द्वारा दिया गया धन उसी काम में लगा है , जिसके लिये वो राशि दी गई है।
उक्त बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज डिजिटल भुगतान प्लेटफार्म ई-रूपी का लांच करते हुये कही। इस प्लेटफॉर्म को नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया , डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज , मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर और नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने लांच किया है। यह सिस्टम पर्सन-स्पेशिफिक और पर्पज स्पेशिफिक होगा। ई-रूपी के जरिये बिना किसी फिजिकल इंटरफेस के सर्विसेज उपलब्ध कराने वाले को बेनेफिशयरीज व सर्विसेज प्रोवाइडर्स के साथ कनेक्ट कराया जा सकेगा। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों को ही मिलेगा और भ्रष्टाचार में भी कमी आयेगी। पीएम ने कहा वे खुश हैं कि यह इस साल में शुरू हुआ है , जब भारत अपनी आजादी का 75 वां साल मना रहा है। उन्होंने आगे कहा कि आज देश ने उन लोगों की सोच को भी नकारा और गलत साबित किया है जो कहते थे कि टेक्नोलॉजी तो केवल अमीरों की चीज है। भारत तो गरीब देश है वहाँ टेक्नोलॉजी का क्या काम ? जब हमारी सरकार टेक्नोलॉजी को मिशन बनाने का काम करती थी तो बहुत से राजनेता और कुछ खास किस्म के एक्सपर्ट्स उस पर सवाल खड़ा करते थे। भारत आज दुनियां को दिखा रहा है कि टेक्नोलॉजी से जुड़ने में वो किसी से भी पीछे नहीं है।


















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