यूरिया डीएपी की किल्लत से परेशान किसान, अब सूखे से हलाकान ।
बिरसा / बालाघाट ।
'अब सोच रहा हूँ खेती किसानी छोड़ दूं! यह कहना है बिरसा के एक किसान का,जो इन दिनों हो रही खाद की समस्या के साथ इंद्र देवता की नाराजगी का दंश झेल रहे हैं।बालाघाट जिले में फिलहाल अभी यूरिया और डीएपी की समस्या खत्म भी नही हुई कि पानी की समस्या ने किसानों के खेत के साथ जान भी सूख गई।वैसे भी आधा अगस्त निकल गया है बचत एक सप्ताह में अगर पानी नही गिरा तो किसानों के सामने बहुत बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाएगी।वजह है खाद की किल्लत के चलते बहुत सारे किसानों ने महंगे दरों से खाद का का क्रय किया है जो बारिश न होने के कारण निश्चित ही किसानों के लिए परेशानी का सबब बनेगा।ऐसे में अब किसानों को सरकार से मदद की दरकार है।किसान हमारे देश के अन्नदाता तो है ही साथ ही हमारे देश की आर्थिक स्थिति को सुधारने में अहम भूमिका निभाते हैं।अगर देश मे अच्छी बारिश होती है तो किसान की फसल अच्छी होती है और उन किसानों के माध्यम से हजारों लाखों को रोजगार के साथ सेठ साहूकारों की रोजी रोटी अच्छी खासी चलती है।कहने का मतलब यह है कि जो किसान हाड़तोड़ मेहनत कर अन्न के रूप में पूरे देश का पेट भरता हो उस किसान की ऐसी हालत देखकर किसी का भी सीना छलनी हो जाएगा।देश के अन्नदाता के बारे में कोई भी चिंतित नही है अगर कोई है तो वह है किसान।क्या सरकार और बड़े बड़े उद्धोगपतियों को किसान के ऊपर तरस नही आता?जो दिन भर चाहे धूप हो,पानी गिर रहा हो या हाड़तोड़ ठंड हो सब मौसम में अपने खून को जलाकर हम लोगो के लिए फसल उगाकर दो वक्त के भोजन की व्यवस्था करते हैं उन किसानों की यह हालत?ऐसे में किसान के सामने मुसीबत का पहाड़ खड़ा हो जाता है जब खाद बीज की समस्या हो और ऊपर से बारिश का समय पर न होना किसानों के माथे पर सिलवटे आना स्वाभाविक है।


















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