रतनपुर से ताहिर अली की रिपोर्टर
रतनपुर 02 अगस्त 2021/ महान् रसायन शास्त्री डॉ.प्रफुल्ल चंद्र राय की जयंती पर सरस्वती शिक्षा संस्थान छत्तीसगढ़ रायपुर के मार्गदर्शन मे सरस्वती शिशु मंदिर रतनपुर मे विज्ञान मेला का आयोजन हुआ। 501 दिनबाद खुलने वाले विद्यालय का प्रथम दिवस भारत के महान रसायन शास्त्री डाँ.प्रफुल्ल चंद्र राय के नाम रहा इतने दिनो से बंद रहे विद्यालय के समय को बुरे सपने की भांती भुलाकर बच्चों ने उत्साह के साथ प्रथम दिवस ही विभिन्न कार्यक्रमों मे भाग लेकर अपने बुलंद इरादो का परिचय दिया।विद्यालय द्वारा आयोजित विज्ञान वर्ग पहेली, विज्ञान प्रश्नोत्तरी,निंबध प्रतियोगिता विज्ञान रंगोली, एवं चित्रकला के माध्मय से बच्चो ने अपने मन के विचारों को व्यक्त किया कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सरस्वती बाल कल्याण समिति की कार्यसमिति सदस्य श्रीमती माधवी कश्यप ने दिप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए विजेता प्रतिभागियो को पुरस्कार प्रदान किया। बालवर्ग रंगोली मे कु.आराध्या कश्यप प्रथम स्थान पर रही किशोर वर्ग रंगोली प्रतियोगिता का प्रथम पुरस्कार कु.कुसमनी कश्यप को प्राप्त हुआ।द्वितीय पुरस्कार कु.श्रेया शेष को प्राप्त हुआ।अभिभावक वर्ग मे प्रथम पुरस्कार श्रीमती वर्षा श्रीवास्तव को प्राप्त हुआ।चित्रकला बाल वर्ग मे कु.राशि सिंह बैस को विजेता एवं सर्वज्ञ श्रीवास्तव को उपविजेता का पुरस्कार प्रदान किया गया।किशोर वर्ग चित्रकला मे रघुराजा दिनकर प्रथम प्रिंस कहरा को द्वितीय एवं वैभव नामदेव को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ।
विजेताओं को अपना आशीर्वाद देते हुए मुख्य अतिथि श्रीमती माधवी कश्यप ने सरस्वती शिशु मंदिर मे विद्यार्थी के रूप मे बिताये अपने पुराने दिनो को याद करते हुए कहा की सरस्वती शिशु मंदिर प्राप्त शिक्षा और संस्कारो ने आज मुझे सामजिक जीवन मे आगे बढ़ने का अवसर दिया है।आज विद्यालय प्रारंभ के प्रथम दिवस ही आपको पुरस्कार मिलना ये दर्शाता है की कोरोना संकट के बावजूद हमारी सीखने और समझने की शक्ति मे कोई कमी नही आई है बल्कि हमने बेहतर करने के और अनेक तरीके अपनाये है।
कार्यक्रम सफल संचालन विद्यालय की विज्ञान विभाग की प्रमुख कु. कीर्ति कहरा ने किया एवं आभार प्रदर्शन विद्यालय के प्राचार्य मुकेश श्रीवास्तव ने किया।कार्यक्रम को सफल बनाने मे विद्यालय के आचार्य योगेश गुप्ता,श्याम सुंदर तिवारी,श्रीमती वर्षा श्रीवास्तव अभिभावक अश्विनी कश्यप, श्रीमती राजेश्वरी कश्यप का विशेष योगदान रहा





















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