संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिन भगवान की लीला व भक्तों के चरित्र परम पवित्र व कल्याणकारी हैं - कथा वाचक महिमानंद महाराज (महेन्द्र दुबे)
*दमोह* - भगवान के अनन्य भक्त प्रहलाद कहते हैं जो व्यक्ति केवल अपने कुटुम्बियों के पेट पालने में लगा रहता है कभी भगवद् भजन नहीं करता वह विद्वान भी हो तो भी उसे परमाला की प्राप्ति नहीं हो सकती उसका कभी उद्दार नहीं हो सकता। यह अपना है यह पराया हैं। यह पशु बुद्धि हैं। इस पशु बुद्धि के कारण ही ऐसा भक्त भेदभाव पैदा होता हैं। उक्ताशय के विचार नगर के *स्थानीय गार्डलाइन राम मंदिर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर कथा वाचक आचार्य पं. महिमानंद शास्त्री* ने व्यक्त किये। उन्होने प्रहलाद चरित्र की व्यात करते हुये कहां कि इस संसार में मनुष्य जन्म बडा दुर्लभ है। इस मनुष्य जन्म में श्रीकृष्ण भगवान के चरण कमलो की शरण लेना ही जीव की एकमात्र सफलता है। भगवान कपिल आख्यान के प्रसंग में कपिल भगवान अपनी मां देवहति से कहते है कि मैं साक्षात् भगवान हॅूं। प्रकृति माया और पुरुष आत्मा का मैं स्वामी हॅू, मै समस्त प्राणियो की आत्मा हॅूं जिसका चित्त तीव्र भक्ति योग द्वारा मुझसे स्थिर हो गया है जो मेरे परायण होकर मेरी पवित्र कथाओ का श्रवण कीर्तन करते है। उन भक्तो को संसार के तरह तरह के पाप कोई कष्ट नहीं पहुंचाते। धु्रव चरित्र का वृतांत सुनाते हुये। कहा कि जब धु्रव जी का आत्म ज्ञान हो गया तब वे अपने और समस्त प्राणियो में श्री हरि को विराजमान देखले लगे। श्री हरि की अखंड स्मृति बनी रहे तो मनुष्य सहज है इस दुरुस्त संसार सागर को पार कर सकता है। भगवान और भक्तो के चरित्र धन यश और आय की बृद्धि करने वाले पदम पवित्र और अत्यंत मंगलमय है। नित्य भागवत कथा श्रवण करने वालो में पं शरद बिहारी, पं. पवन दुबे, पं. छोटू शास्त्री, पं. अमित शास्त्री, की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। कथा श्रवण के लिये श्रृद्धालु भक्तगण बडी संख्या में उपस्थिति हो रहे है।


















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