महासमुंद 01 अगस्त 2021/ बागबाहरा जनपद पंचायत उपाध्यक्ष भेख लाल साहू ने सोसाइटियों के कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने को लेकर कहा कि किसानी के अति आवश्यक समय में सोसाइटियों में ताला लगना किसानों के लिए दुर्भाग्य का सबब बन गया है। ताला बंद होने से गरीब उपभोक्ताओं को राशन चावल शक्कर, नमक मिट्टी तेल अन्य सामग्री लेने में भारी दिक्क़तें हो रही हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना न्याय योजना शून्य फीसद ब्याज दर पर ऋण वितरण पूरी तरह ठप है। मौजूदा समय में खेती किसानी के लिए खाद एवं दवाई की आवश्यकता है। किसान समितियों में भटक रहे हैं। निजी दुकानदारों ने खाद के दाम बढ़ा दिए हैं। समितियों में पूर्णता तालाबंदी की स्थिति है।
उन्होंने जारी विज्ञप्ति में कहा कि छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी महासंघ के प्रांतीय संगठन द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रदेश की सभी सोसाइटियों के कर्मचारी 24 जुलाई से आपातकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। 27 जुलाई को विधानसभा घेराव करके प्रदेशभर के कर्मचारियों ने अपने मांगों को सरकार के बीच रखें। खेती-किसानी की महत्वपूर्ण समय पर प्रदेश की 2058 सहकारी समितियों में तालाबंदी की नौबत आ गई है।
साहू जी ने कहा कि सरकार को कर्मचारियों के हित में तत्काल निर्णय लेकर हड़ताल वापसी के दिशा में उचित पहल करनी चाहिए, किंतु शासन-प्रशासन द्वारा किसी प्रकार की पहल नहीं किया जाना सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
उपाध्यक्ष भेखलाल साहू ने कहा छत्तीसगढ़ के इतिहास में किसानों के लिए ऐसा दुर्भाग्य की स्थिति पहले उत्पन्न नहीं हुई थी। शासन की गलत नीतियों के चलते धान उपार्जन केंद्रों में कई महीनों से धान पड़ा रह गया। जिसके कारण समय अवधि में परिवहन नहीं होने से भारी शार्टेज आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। लंबे समय तक रखरखाव के कारण सोसायटी के कर्मियों को आर्थिक रूप से भारी नुकसान हुआ है। इन सभी की भरपाई किए जाने हेतु आवश्यक रूप से सरकार को प्रावधान किया जाना चाहिए। सोसाइटी में धान शॉर्टेज की भरपाई जहां सोसाइटियों को दिए जाने वाले कमीशन की राशि से काट ली जाती है, वहीं सोसाइटी और कर्मचारियों को प्रोत्साहन राशि से वंचित रखा गया। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होने लगी। सहकारी समितियों में पिछले कई वर्षों से अल्प वेतन में पूर्ण निष्ठा लगन एवं ईमानदारी के साथ लगभग पूरे प्रदेश में हजारों कर्मचारी सेवारत है, लेकिन आज भी सहकारी समितियों के कर्मचारी सम्मान जनक वेतन व अन्य सुविधाओं से वंचित है। जिससे कर्मचारी हतोत्साहित व अपने भविष्य को लेकर चिंतित है। जिसके चलते उन्हें हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होना पड़ा है।


















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