बालोद
सी एन आई न्यूज़
"भक्ति पदारथ तब मिले
जब गुरु होय सहाय ।।"
"प्रेम प्रीति की भक्ति
जो पूरण भाग मिलाय ।।"
जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल महाराज जी कहते है कि भक्ति रूपी अनमोल तत्व की प्राप्ति तभी होती है। जब गुरु सहायक होते है ।गुरु की कृपा के बिना भक्ति रूपी अमृत रस को प्राप्त कर पाना पूर्णतया असम्भव है ।अशांति, परेशानियां तब शुरु हो जाती हैं। जब मनुष्य के जीवन मे सत्संग नही होता। मनुष्य जीवन को जीता चला जा रहा है। लेकिन मनुष्य इस बारे मे नही सोचता की जीवन को कैसे जीना चाहिये।मनुष्य ने धन कमा लिया, मकान बना लिया, शादी घर परिवार बच्चे सब हो गये, गाडी खरीद ली, यह सब कर लेने के बाद भी मनुष्य का जीवन सफल नही हो पायेगा।क्योंकि जिसके लिए यह जीवन मिला उसको तो मनुष्य ने समय दिया ही नही। और संसार की वस्तुयें जुटाने मे समय नष्ट कर दिया।जीवन मिला था परमात्मा को पाने के लिए, लेकिन मनुष्य माया का दास बनकर माया की प्राप्ति के लिए इधर-उधर भटकने लगता है, और इस तरह मनुष्य का यह कीमती जीवन नष्ट हो जाता है।जिस अनमोल रतन मानव जीवन को पाने के लिए भगवान भी तरसते रहते हैं। उस जीवन को मनुष्य व्यर्थ मे गवां देता है।देवताओ के पास भोगों की कमी नही है। लेकिन फिर भी देवता मनुष्य जीवन जीना चाहते हैं।क्योंकि मनुष्य देह पाकर ही भक्ति का पूर्ण आनंद और परमात्मा की सेवा और गुरु कृपा से सत्संग का सानिध्य मिलता है।सद्गुरु के संग से मिलने वाला आनंद तो बैकुण्ठ मे भी दुर्लभ है।


















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