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Sunday, August 8, 2021

ज्ञान का पिटारा, मुकेश श्रीवास्तव प्राचार्य सरस्वती शिशु मंदिर रतनपुर कलम से



छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति का पर्व हरेली खेती किसानी मे प्रयुक्त औजारो के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का पर्व है हरेली


रतनपुर....लोक पर्व हरेली पर आज खेती-किसानी में काम आने वाले औजार रापा गैंती फावड़ा,कुदाल,हल आदी के माध्यम से खेतो की जुताई,बुवाई,आदि की जाती है और इनके माध्यम से ही किसानो के जीवन मे और खेतो मे हरियाली छा जाती है। चुंकी खेती का काम पूरा हो जाता है तो इन औजारो की साफ सफाई करके उनके प्रति आभार मानते हुए की आप सबके सहयोग से ही हमने अपने जीवन मे खुशहाली लाने के लिए खेती बाड़ी का कार्य किया है इसलिए आपके प्रति कृतज्ञता का भाव अर्पित करते है,आपकी कृपा से हम सबके जीवन मे खुशियों की हरियाली हमेशा छाई रहे इन्ही कामनाओं के साथ किसान भाई विधि पूर्वक अपने औजारो की पूजा करते है। यथा योग्य पारंपरिक पकवानो का नैवेद्य अर्पित करते है।यह इस बात का संकेत है की हमारी सांस्कृतिक विरासत कितनी वैज्ञानिक है कि हम प्रकृति संरक्षण और सवंर्धन के लिए ही हर प्रकार के जतन करते है।चुंकी इस समय बरसात का समय होता है और गांवो कीचड़ बहुत होता था इनसे बचने के लिए ही युवा और बच्चे अपनी शक्ति के अनूरूप लकड़ी का गेड़ी बनाकर चढ़ते रहे जो कालांतर मे हमारी संस्कृति का अटुट हिस्सा बनकर वर्तमान मे छत्तीसगढ़ी खेलो मे प्रमुख स्थान प्राप्त कर चुका है। गेड़ी का खेल शारीरिक सौष्ठव, संतुलन अनुशासन और साहस का खेल है। हरेली का त्यौहार प्रकृति का पर्व होने के साथ साथ ग्रामीण खेलो एवं सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाला पर्व है

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