बालोद
सी एन आई न्यूज़
बालोद -:-छत्तीसगढिया क्रान्ति सेना गुरुर ब्लाक संयोजक झम्मन लाल हिरवानी ने हरेली त्योहार से सुभ अवसर पर क्षेत्र के आम जनता को बधाई देते हुए मे खुशहाली की कामना किया और कहा कि , छत्तीसगढ़ अपनी सांस्कृतिक विरासत में समृद्ध है। छत्तीसगढ़ राज्य में एक बहुत ही अद्वितीय और जीवंत संस्कृति है। इस क्षेत्र में 35 से अधिक बड़ी और छोटी रंगो से भरपूर जनजातियां फैली हुई हैं। उनके लयबद्ध लोक संगीत, नृत्य और नाटक देखना एक आनंद दायक अनुभव है जो राज्य की संस्कृति में अंतर्दृष्टि भी प्रदान करता हैं। झम्मन लाल हिरवानी के कहा छत्तीसगढ़ी संस्कृति सम्पूर्ण भारत में अपना बहुत ही ख़ास महत्त्व रखती है। भारत के हृदय-स्थल पर स्थित छत्तीसगढ़, जो भगवान श्रीराम की कर्मभूमि है।,
छत्तीसगढ़ के लोगों के बीच का सबसे लोकप्रिय और सबसे पहला त्यौहार हरेली है। पर्यावरण को समर्पित यह त्यौहार छत्तीसगढ़ीया लोगों का प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण को दर्शाता है। सावन मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह त्यौहार पूर्णतः हरियाली का पर्व है और किसानों का महा पर्व है । उन्होने कहा कि किसानों का यह हरेली त्यौहार उनकी औज़ार पूजा से शुरू होता है, किसान आज काम पर नहीं जाते घर पर ही खेत के औजार व उपकरण जैसे नांगर, गैंती, कुदाली, रापा इत्यादि की साफ-सफाई कर पूजा करते हैं साथ ही साथ बैलों व गायों का भी इस शुभ दिन पर पूजा की जाती है। इस त्यौहार में सुबह – सुबह घरों के प्रवेश द्वार पर नीम की पत्तियाँ व चौखट में कील लगाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि द्वार पर नीम की पत्तियाँ व कील लगाने से घर में रहने वाले लोगो की नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती हैं ।
हरेली में ग्रामीणों द्वारा अपने कुलदेवताओं का भी विशेष पूजन किया जाता है, विशेष पकवान जैसे गुड़ और चावल का चिला छत्तीसगढ़ी व्यंजन कटवा खुर्मी ठेठरी,खीर पकवान मेवा मिस्ठान बनाकर मंदिरों में चढ़ाया जाता है।
छत्तीसगढ़ के गाँव मे तो इस पर्व की बड़ी धूम दिखती है साथ ही साथ शहरों में भी आपकों दरवाज़े पर नीम टाँगने की रस्म दिख ही जाएगी। हरेली त्योहार छत्तीसगढ़ संस्कृति की अनोखा पर्व है।


















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