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Thursday, November 18, 2021

म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन की बालाघाट इकाई ने आयोजित किया कवि सम्मेलन और विमर्श गोष्ठी मनाया गया साहिर लुधियानवी का जन्मशताब्दी वर्ष

 म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन की बालाघाट इकाई ने आयोजित किया कवि सम्मेलन और विमर्श गोष्ठी


मनाया गया साहिर लुधियानवी का जन्मशताब्दी वर्ष



बालाघाट। मध्यप्रदेश हिन्दी साहित्य सम्मेलन की बालाघाट इकाई द्वारा विगत दिवस स्थानीय पत्रकार भवन में साहिर लुधियानवी के जन्मशताब्दी वर्ष के अवसर पर 'साहिर की शायरी में सर्वहारा वर्ग की गूँज' विषय पर विमर्श गोष्ठी एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। दो चरणों मे सम्पन्न हुए इस कार्यक्रम का साहित्य प्रेमियों ने भरपूर रसास्वादन किया। बुद्दिजीवियों एवं कवियों- शायरों ने सामाजिक सरोकारों की पैरवी करते हुए राष्ट्र की प्रगति के लिए समर्पित अपने विचारों को दृढ़ता के साथ व्यक्त किया।


            उल्लेखनीय है कि, दैनिक देशबन्धु के ब्यूरो चीफ एवं मध्यप्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ के जिला अध्यक्ष इन्द्रजीत भोज ने आयोजन के प्रथम सत्र का उद्घाटन करते हुए कहा कि, साहिर लुधियानवी की शायरी और गीत सर्वहारा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी रचनाओं में सामाजिक चेतना की गूँज साफ़ तौर पर सुनाई देती है।


उन्होंने अपना पूरा जीवन द्वंद्वात्मक भौतिकवाद एवं वर्ग संघर्ष की गहरी समझ के साथ शोषणमुक्त समतामूलक समाज की स्थापना को समर्पित कर दिया। बालाघाट इकाई के अध्यक्ष कुंजकिशोर विरुरकर ने साहिर साहब को जनकवि की संज्ञा देते हुए कहा कि, उन्होंने चाहे दीवान के लिए लिखा हो या फ़िल्मी गीतों के लिए उनके एक- एक लफ़्ज़ में आम आदमी की पीड़ा, उसकी छटपटाहट बयाँ होती है और वे ख़ुद ही उससे मुक्ति का मार्ग भी प्रशस्त करते हैं।

            साहिर लुधियानवी को सामाजिक चेतना का पैरोकार बताते हुए अजय बिसेन ने उनकी शायरी में उर्दू और हिंदी के सफल प्रयोग की सराहना की। उन्होंने भाषा की शुद्धि, उचित प्रयोग और संवर्धन ओर भी बल दिया। रजनीश राहंगडाले ने साहिर लुधियानवी को अवाम का सच्चा हमदर्द बताते हुए उन्हें आम आदमी का साथी बताया, जो समाज को शोषण के विरुद्ध लड़ने और अपने अधिकारों को प्राप्त करने के लिये प्रेरित करता है। मुख्य वक्ता के रूप में आकाशवाणी बालाघाट के वरिष्ठ उद्घोषक एवं सम्मेलन की प्रदेश इकाई के कार्यकारिणी सदस्य प्रकाश उदय ने साहिर लुधियानवी के कुछ चुनिंदा शे'रों के साथ अपनी बात की शुरुआत करते हुए उनके मशहूर मजमुए 'तल्खियाँ' को समाज के लिए एक कालजयी दस्तावेज़ बताया। 'इतनी शक्ति हमें देना दाता' के रचयिता गीतकार अभिलाष की ज़ुबानी सुने साहिर साहब के कई संस्मरण मंच पर साझा करते हुए उन्होंने कहा कि, साहिर लुधियानवी पर केंद्रित यह ऐतिहासिक विमर्श गोष्ठी बालाघाट के इतिहास में हमेशा हमेशा के लिए दर्ज हो गई है, हम सब सौभाग्यशाली हैं जो उन्हें याद करने का यह गौरव हमें प्राप्त हुआ।

            आयोजन का दूसरा चरण कविगोष्ठी के साथ आरम्भ हुआ। शायर साजिद खैरो ने अपने अल्फ़ाज़ कुछ इस तरह व्यक्त किये- जहाँ में दिख नहीं सकता यहाँ पर जो नज़ारा है, कहीं मंदिर कहीं मस्जिद कलीसा है गुरुद्वारा है, क़यामत तक यूँ ही क़ायम रहे ये दरमियाँ अपने, बड़ा मशहूर दुनिया में जो अपना भाईचारा है। नवोदित कवि लक्ष्मीचंद ठाकरे ने अपनी रचना पढ़ते हुए कहा- एक जून की दो रोटी का भी आधार नहीं, अंधकार में जीवन जिसका शिक्षा का हक़दार नहीं, रात बिताने आ जाते हैं सो जाते हैं रैन बसेरों में, अपना भाग्य टटोला करते हैं, कचरे के ढ़ेरों में। किशोर छिपेश्वर की कविता ' अभी ईमान है ज़िन्दा, बड़े हम ठाठ वाले हैं, मोहब्बत भी सिखा देंगे, कि बालाघाट वाले हैं' भी बहुत पसन्द की गई। डॉ. एम. के. मजूमदार ने अपनी रचना में गम्भीर चिंतन व्यक्त करते हुए कहा कि, कविता निराला की निष्ठा महादेवी का त्याग है, कविता धूमिल की और दुष्यंत की वैचारिक आग है, कविता मरुस्थल में जल की तलाश है, कविता सर्वहारा की अंतिम आस है।

            कुंजकिशोर विरुरकर ने अपने शब्दों को कुछ इस तरह से तरतीब दी ' वो अपने आप में पहाड़ों का एक पूरा मौसम थी सुहाना सा, पूरे वर्ष भर उसकी आर्द्रता से नमी पाते थे कई ठूँठ, फूट पड़ती थी जब कोंपले उसके भीतर से। असीम आमगांवी ने अपने कलाम को इस तरह ज़ुबाँ दी 'लब पर तो बस वतन से मुहब्बत की बात है, लेकिन उन्हीं के दिल में बग़ावत की बात है, उनका ये फ़लसफ़ा है हमारी समझ से दूर, बदनामियों को कहते हैं शोहरत की बात है। इनके अलावा भाऊराव महंत, पंकज जुगनू, रवि नावानी, अनुज ज़फ़र, विनय श्रीवास्तव और प्रकाश उदय की कविताओं को भी अत्यंत सराहा गया। इस अवसर पर अखबारों की कतरनों को संकलित कर उन्हें सम्बन्धितों तक पहुँचाने का अनूठा कार्य करने के लिए मिश्रीलाल साहू को विशेष रूप से सम्मेलन की तरफ से सम्मानित किया गया। कविगोष्ठी तथा वैचारिक विमर्श में सुधि श्रोता प. अजय नारायण तिवारी,अमित वैद्य, पत्रकार शुभम मेश्राम, मुदस्सर खान, जनाब मो. रफ़ीक खान तथा प्रवेश वाहने विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एम. के. मजूमदार ने और आभार प्रदर्शन कुंजकिशोर विरुरकर ने किया।

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