भ्रस्ट सरपंच पर अधिकारी मेहरबान
बिरसा/बालाघाट।जनता के द्वारा चुना गया जनप्रतिनिधि अगर जनता की जेब पर ही डाका डाले तो ऐसे भ्रस्ट जनप्रतिनिधि को नकेल डालने का काम करता है स्थानीय प्रशासन।लेकिन बिरसा जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्रामपंचायत अचानकपुर का मामला थोड़ा अलग है।सूत्रों से जानकारी अनुसार ग्रामपंचायत पंचायत अचानकपुर के सरपंच दीनू पंचेश्रवर और रोजगार सहायक जो सचिव का दायित्व भी निभा रहे थे इन दोनों के कार्यकाल में जमकर भ्रष्टाचार हुआ।जिसके फलस्वरूप सरपंच दीनू पंचेश्वर के ऊपर लाखो की रिकबरी निकली।लाखो करोड़ो रूपये के कार्य मे दोनों के द्वारा जमकर लूट मचाई गयी।जिसमे सी सी सड़क निर्माण, सार्वजनिक शौचालय व स्कूल में किया गया निर्माण चाहे वह चारदीवारी का हो या शौचालय बनाने का दोनों ने जमकर अपनी जेबें भरी।जिसका जीता जागता उदाहरण ग्राम में बना चार लाख के करीब का सार्वजनिक शौचालय है जो बनकर तैयार तो गया है लेकिन पंचायत प्रतिनिधि की लापरवाही से आमजन के काम नही आ रहा है जिसमे ताला जड़ा रहता है।जब इस बारे में रोजगार सहायक गोवर्धन बाहेश्वर से जानकारी ली गयी तो साहब ने कहा कि सरपंच ने मना किया है।अब सरपंच दीनू पंचेश्वर को इसका जबाब तो देना ही पड़ेगा कि चार लाख का बना शौचालय में ताला क्यों लगाया गया है।अब इसके पीछे कारण कई हो सकते हैं।ग्रामीणों के अनुसार शौचालय का निर्माण पूरा ही नही हुआ है जबकि पूरी राशि का आहरण सरपंच व रोजगार सहायक के द्वारा कर लिया गया है।शौचालय के अंदर बहुत सारा काम बचा हुआ है जैसे टाइल्स,टोटी,पाइप और पानी आदि का व्यवस्था का न होना, जिसको दिखाने में रोजगार सहायक ने असमर्थता जताई।इस मामले में रोजगार सहायक ने बताया कि सभी के घरों में शौचालय है इसलिए कोई सार्वजनिक शौचालय का उपयोग करने के लिए अभी तक नही आया,जब सभी घरों में शौचालय है
तो सार्वजनिक शौचालय में लाखों रुपए बर्बाद करने का मकसद दोनों का क्या था?और जब आजतक ताला ही नही खुला तो प्रयोग करने कौन जाएगा।बहरहाल अचानकपुर ग्रामपंचायत के ऊपर सवाल बहुत है जिसका जबाब आने वाले चुनाव में जनता देगी।इस मामले में जनपद पंचायत बिरसा के सीईओ अजित बर्वा ने बताया कि शौचालय बनकर तैयार है जिसका उद्घाटन कर खोल दिया जाएगा।बता दे रोजगार सहायक गोवर्धन बाहेश्वर व सरपंच दीनू पंचेश्वर एक ही गांव के होने के कारण भी दोनों ने जमकर लुटपाट मचाई जिसका खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है और अपनी गाढ़ी कमाई को यूं ही लूटते देखने के सिवा इनके पास कुछ नही होता है।लेकिन कहा गया है कि अति का अंत जरूर होता है जो सरपंच दीनू पंचेश्वर के ऊपर सटीक बैठता है।

















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