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Wednesday, December 22, 2021

प्रोफेसर नीना गुप्ता रामानुजन पुरस्कार से सम्मानित



अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

नई दिल्ली - इंडियन स्टैटिस्कल इंस्टीट्यूट (भारतीय सांख्यिकी संस्थान) कोलकाता में मैथ्स की प्रोफेसर नीना गुप्ता को विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों के लिये जारिस्की रद्दीकरण समस्या की दिशा में उनके काम के लिये गणित के क्षेत्र में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक रामानुजन पुरस्कार 2021 से सम्मानित किया गया है। उन्हें 'एफाईन अलजबरिस ज्योमेट्री' और 'कम्यूरेटिव प्रापर्टी' में उत्कृष्ट कार्य के लिये सम्मानित किया गया है। इसके पहले वर्ष 2014 में प्रोफेसर नीना गुप्ता को भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी से "यंग साइंटिस्ट अवार्ड" और शांति स्वरूप भटनागर अवार्ड 2019 मिला था। नीना को अंतर्राष्ट्रीय गणितज्ञ कांग्रेस (ICM) 2022 में एक वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है। भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और गणितीय संघ (आईएमयू) के साथ अब्दुस सलाम इंटरनेशनल सेंटर फॉर थियोरेटिकल फिजिक्स (आईसीटीपी) द्वारा यह पुरस्कार संयुक्त रूप से प्रदान किया जाता है।

यह पुरस्कार हर साल एक प्रख्यात गणितज्ञ को दिया जाता है , जिनकी उम्र पुरस्कार दिये जाने वाले वर्ष के 31 दिसंबर को 45 वर्ष से कम हो और जिन्होंने विकासशील देशों में उत्कृष्ट शोध कार्य किया है।


एक नजर रामानुजन पुरस्कार पर


भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के नाम पर यह पुरस्कार पहली बार वर्ष 2005 में दिया गया था। इस पुरस्कार का पूरा टाईटल रामानुजम प्राइज फार यंग मैथमेटिशियन है , नीना गुप्ता रामानुज पुरस्कार जीतने वाली चौथी भारतीय और विश्व की तीसरी महिला है। अब तक जिन चार भारतीयों को रामानुजन पुरस्कार मिला है , उनमें से तीन इंडियन स्टैटिस्कल इंस्टीट्यूट के ही फैकल्टी मेम्बर हैं। नीना गुप्ता से पहले भारतीय गणितज्ञ रामदोराई सुजाता को वर्ष 2006 , अमलेंदु कृष्णा को वर्ष 2015 और रीताब्रत मुंशी को वर्ष 2018 में सम्मानित किया जा चुका है। मीडिया से चर्चा करते हुये नीना गुप्ता ने कहा मैं इस पुरस्कार को प्राप्त करने के लिये सम्मानित महसूस कर रही हूं। हालांकि यह पर्याप्त नहीं है , एक शोधकर्ता के रूप में मुझे लगता है कि बहुत अधिक गणितीय समस्यायें हैं जिनका समाधान हमें खोजना है। इसके लिये मान्यता प्राप्त करना काम निश्चित रूप से मुझे शोध क्षेत्र में और अधिक मेहनत करने के लिये प्रेरित करता है।

गौरतलब है कि नीना गुप्ता का जन्म वर्ष 1984 में कोलकाता में एक औसत भारतीय परिवार में हुआ था। ये कोलकाता में ही पली -बढ़ी हैं और वहीं इन्होंने खालसा हाईस्कूल से अपनी स्कूलिंग पूरी की। उन्होंने वर्ष 2006 तक बेथ्यून कॉलेज में गणित में बीएससी (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की। इसके बाद वर्ष 2008 में भारतीय सांख्यिकी संस्थान से गणित में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया और वर्ष 2011 में अपनी विशेषज्ञता के रूप में कम्यूटेटिव बीजगणित में पीएचडी की। आगे चलकर वह आईएसआई कोलकाता में सांख्यिकीय और गणित इकाई में एक सहयोगी प्रोफेसर बन गईं और जून 2014 से वहां काम करती हैं। उन्हें गणित विषय के लिये प्रेम का एहसास बचपन में ही हो गया था और उन्होंने इस पर काम शुरू कर दिया था। वह दिसंबर 2012 से जून 2014 तक आईएसआई कोलकाता में इंस्पायर फैकल्टी और 2012 में टीआईएफआर मुंबई में विजिटिंग फेलो भी रहीं।


कौन थे श्रीनिवास रामानुजन ?


श्रीनिवास रामानुजन एक महान भारतीय गणितज्ञ थे। इनका जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के इरोड गांव में हुआ था। उन्होंने गणित के क्षेत्र में संख्या सिद्धांत , गणितीय विश्लेषण और अनंत श्रृंखला में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। एक अंग्रेज गणितज्ञ गाडफ्रे हेरोल्ड हार्डी ने उनके योगदान को पहचाना और वर्ष 1913 में रामानुजन को कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के लिये आमंत्रित किया। वर्ष 1918 में उन्हें रायल सोसाइटी आफ लंदन के लिये चुना गया था। हालांकि वर्ष 1919 में हेपेटिक अमीबासिस ने रामानुजन को भारत लौटने के लिये मजबूर कर दिया। भारत लौटने के बाद लंबी बीमारी के कारण 26 अप्रैल 1920 को मात्र 32 वर्ष की अल्पायु में ही उनका निधन हो गया। उनकी स्मृति में 22 दिसंबर को राष्ट्रीय गणित दिवस मनाया जाता है। वर्ष 2005 से विकासशील देशों के युवा गणितज्ञों के लिये हर साल दिये जाने वाले रामानुजन पुरस्कार का नाम भारतीय गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के नाम पर ही रखा गया है। यह पुरस्कार वर्ष 2005 में मार्सेलो वियाना (ब्राजील)को , वर्ष 2006 में रामदोराई सुजाता (भारत) को , वर्ष 

2007 जॉर्ज लॉरेट (अर्जेंटीना) को , वर्ष 2008 में एनरिक पुजल (अर्जेंटीना/ब्राजील) को , वर्ष 2009 मेंअर्नेस्टो लुपेर्सियो (मेक्सिको) को , वर्ष 2010 में शी यूगुआंग (चीन) को , वर्ष 2011में फिलिबर्ट नांग (गैबॉन) को , वर्ष 2012 फर्नांडो कोडा मार्क्स (ब्राजील) को , वर्ष 2013 में तियान ये (चीन) को , वर्ष 

2014 में मिगुएल वॉल्श (अर्जेंटीना) को , वर्ष 2015 में अमलेंदु कृष्णा (भारत) को , वर्ष 2016 में चेनयांग जू (चीन) को , वर्ष 2017 में एडुआर्डो टेक्सीरा (ब्राजील) को , वर्ष 2018 में ऋतब्रत मुंशी (भारत) को , वर्ष 2019 में होआंग हीप फाम (वियतनाम) को , वर्ष 2020 में कैरोलिना अरुजो (ब्राजील) को और इस वर्ष 2021 में नीना गुप्ता (भारत) को मिला है।

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