बगैर पंजीयन एवं लायसेंस केसंचालित वारासिवनी के दो क्लीनिक को किया गया सील
बालाघाट।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडेय द्वारा बगैर पंजीयन एवं लायसेंस के मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार अधिनियम का उल्लंघन कर वारासिवनी में संचालित दो चिकित्सा क्लीनिकों को सीलबंद कराया गया है। इसके साथ ही चिकित्सा व्यवसाय के लिए मकान या दुकान किराये पर देने वाले संपत्ति मालिकों से भी अपील की गई है
नहीं पाया गया चिकित्सा योग्यता का प्रमाण पत्र
स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण के सदस्य डॉ कमलेश झोड़े, चिकित्सा अधिकारी, सिविल अस्पताल वारासिवनी, श्रीमती कलावती कटरे, श्री मोहम्मद अकरम मंसूरी एवं श्री हेमंत बोहरे द्वारा 09 दिसंबर 2021 को वारासिवनी शहर के गोलीबारी चौक में डॉ विमल के. बिसेन द्वारा संचालित चरक हेल्थ क्लीनिक का आकस्मिक निरीक्षण किया गया । निरीक्षण के दौरान डॉ विमल के बिसेन की योग्यता बीएचएमएस बताई गई। लेकिन क्लीनिक में उनके चिकित्सकीय योग्यता संबंधी कोई भी प्रमाण पत्र नहीं पाया गया। क्लीनिक में ईसीजी मशीन एवं एलोपैथी औषधियां पायी गई। इस क्लीनिक का विधिवत पंजीयन एवं लायसेंस नहीं पाया गया। जिस पर डॉ विमल के बिसेन के क्लीनिक में पाये गये उपकरणों व औषधियों को जब्त कर क्लीनिक को सीलबंद कर दिया गया है।
गंभीर स्थिति में पाया गया 70 वर्षीय मरीज
इसी प्रकार वारासिवनी शहर में सिविल लाईन के पीछे मस्जिद के पास श्री अनुप चौबे अधिवक्ता के मकान में प्रथम तल पर किराये पर मकान लेकर डॉ आर एच थेर द्वारा निजी अस्पताल संचालित किये जाने की सूचना पर तहसीलदार श्री राजेन्द्र तेकाम के नेतृत्व में गठित दल के सदस्य जिला चिकित्सालय के मेडिकल आफिसर डॉ अरूण कुमार लांजेवार, श्रीमती कलावती कटरे, श्री मोहम्मद अकरम मंसूरी एवं श्री हेमंत बोहरे द्वारा 15 दिसंबर को नर्सिंग होम सेल का आकस्मिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अस्पताल में लगभग 70 वर्षीय पुरूष रोगी भर्ती पाया गया, जो कि लकवा रोग से ग्रस्त था। इस रोगी के स्वास्थ्य की गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉ अरूण लांजेवार द्वारा तत्काल 108 एम्बुलेंस बुलाकर रोगी को सिविल अस्पताल वारासिवनी भिजवाया गया। जहां पर डॉ कमलेश झोड़े द्वारा रोगी का परीक्षण करने के उपरांत उसे जिला चिकित्सालय बालाघाट रेफर कर दिया गया। इस निजी अस्पताल में पायी गई ईसीजी मशीन, मल्टीपेरा मानीटर, ऐलोपैथिक दवायें, ब्लड सेंपल कलेक्शन ट्यूब आदि को जब्त कर इस निजी अस्पताल को सीलबंद कर दिया गया है।
संदेहजनक पाया गया योग्यता प्रमाण पत्र
निरीक्षण के दौरान डॉ आर एच थेर द्वारा संचालित निजी अस्पताल में गांधी मेडिकल कालेज भोपाल से प्राप्त योग्यता संबंधी प्रमाण पत्र पाया गया, जो कि प्रथम दृष्टया संदेहास्पद प्रतीत हो रहा है। डॉ थेर के इस प्रमाण पत्र को सत्यापन के लिए डीन गांधी मेडिकल कालेज भोपाल को भेजा जा रहा है। वारासिवनी में अवैध रूप से संचालित इन दोनों चिकित्सा संस्थाओं के विरूद्ध विधि के अनुसार अग्रिम कार्यवाही की जा रही है।
बिना पंजीयन व लायसेंस का चिकित्सा व्यवसाय न करें
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ मनोज पांडेय ने बताया कि प्राय: यह देखने में आ रहा है कि सेवानिवृत्त चिकित्सकों, एमबीबीएस चिकित्सकों, बीएएमएस आयुर्वेदिक चिकित्सकों, दंत चिकित्सकों तथा होम्योपैथिक चिकित्सकों द्वारा मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार अधिनियम के अधीन पंजीयन कराये बिना तथा लायसेंस प्राप्त किये बिना ही चिकित्सा व्यवसाय कर अधिनियम का उल्लंघन कर रहे है। यह भी संज्ञान में आया है कि चिकित्सक द्वारा अपनी चिकित्सकीय योग्यता के अनुरूप चिकित्सा व्यवसाय के अतिरिक्त अन्य चिकित्सा पद्धति से भी रोगियों का उपचार किया जा रहा है। जो कि नियम विरूद्ध होने के साथ ही रोगियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रहे है।
पंजीयन लायसेंस के लिए आनलाईन आवेदन करें
डॉ मनोज पांडेय ने मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय योग्यताधारी चिकित्सा व्यवसाय करने वाले सभी चिकित्सकों को निर्देशित किया है कि वे शीघ्र ही विभाग के वेवसाईट पर आनलाईन आवेदन कर क्लीनिक अथवा निजी अस्पताल या नर्सिंग होम के संचालन के लिए विधिवत पंजीयन करायें और लायसेंस प्राप्त कर ही अपनी योग्यता के अनुरूप चिकित्सा पद्धति से ही चिकित्सा व्यवसाय करें।
पंजीयन व लायसेंस का परीक्षण करके ही किराये पर दे संपत्ति
डॉ मनोज पांडेय ने चिकित्सा व्यवसाय के लिए मकान या दुकान किराये पर देने वाले संपत्ति मालिकों से भी अपील की है कि वे मध्यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार अधिनियम के अंतर्गत पंजीयन प्रमाण पत्र एवं लायसेंस का परीक्षण करने के उपरांत ही संबंधित चिकित्सक के साथ किराया अनुबंध संपादित करें। जिससे स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाने वाली कार्यवाही से संपत्तिधारक को किसी प्रकार की असुविधा न हो सके।

















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