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Saturday, December 11, 2021

सीडीएस बिपिन रावत आईएमए के गौरव - महामहिम राष्ट्रपति

 


अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट

देहरादून - हमारा झंडा दिवंगत सीडीएस जनरल बिपिन रावत जैसे बहादुर पुरुषों के कारण हमेशा ऊंचा रहेगा। उन्होंने यहां आईएमए में प्रशिक्षित प्राप्त किया था। आईएमए से पास आउट होने वाले कैडेट ऐसे ही हमेशा भारत के सम्मान की रक्षा करेंगे।

             उक्त बातें महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज भारतीय सैन्य अकादमी देहरादून में पासिंग आउट परेड के सलामी लेने के बाद सीडीएस जनरल बिपिन रावत को याद कर कैडेटों को संबोधित करते हुये कही। उन्होंने मुझे यहां 387 जेंटलमैन कैडेटों को देखकर खुशी हो रही है , जो जल्द ही अपनी वीरता और ज्ञान की यात्रा पर निकलेंगे। अफगानिस्तान , भूटान , मालदीव , म्यांमार , नेपाल , श्रीलंका , ताजिकिस्तान , तंजानिया , तुरमेकिनिस्तान और वियतनाम के मित्रवत विदेशी देशों के जेंटलमैन कैडेट होने पर भारत को गर्व है। महामहिम ने अपने संबोधन में जेंटलमैन कैडेटों का उत्साहवर्धन कर उनके बेहतर भविष्य और देश की सुरक्षा के लिये संदेश देते हुये राष्ट्र की सेवा के लिये खुद को समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने जेंटलमैन कैडेट को उन चुनौतियों के बारे में बताया जिनका आज हमारा राष्ट्र , क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर सामना कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के आधुनिक समय के खतरों से निपटने के लिये केवल शारीरिक और मानसिक दृढ़ता ही पर्याप्त नहीं है , बल्कि सैन्य अधिकारी के रूप में अधिकारियों को एक रणनीतिक मानसिकता विकसित करनी होगी। सैन्य कौशल को सुधारने के लिये मानसिक तौर पर मजबूत होना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में युद्ध की तकनीक बदल गई है , 

इसलिये सैन्य अधिकारियों को इन तकनीकों को अपनाना होगा। बताते चलें वर्ष 1971के भारत - पाक युद्ध में भारतीय सशस्त्र सेनाओं की जीत के पचास साल पूरे होने के अवसर पर  इस परेड को यादगार बनाने की तैयारी चल रही थी। इस परेड में सीडीएस जनरल बिपिन रावत को शामिल होना था लेकिन हेलिकॉप्टर हादसे में उनके निधन के चलते परेड के दौरान ड्रिल स्क्वायर पर मार्चपास्ट , अवार्ड ड्रिस्ट्रीब्यूशन , पीपिंग और ओथ सेरेमनी की रस्म को बिना जश्न के सादगीपूर्ण तरीके के साथ आयोजित किया गया। शेड्यूल में पूर्व निर्धारित मल्टी एक्टिीविटी डिस्पले और लाइट एंड साउंड शो को राष्ट्रीय शोक के चलते रद्द कर दिया गया। सीडीएस के निधन के बाद उत्तराखंड सरकार की ओर से राज्य में तीन दिन का राजकीय शोक भी घोषित किया गया है। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी से कुल 387 जेंटलमैन कैडेट्स आज पास आउट हुये , इनमें से 319 भारतीय कैडेट्स पास आउट होकर बतौर लेफ्टिनेंट थल सेना में शामिल हुये वहीं आठ मित्र देशों के 68 कैडेट्स भी पास आउट होकर अपने-अपने देशों की सेनाओं में शामिल होंगे। इस पासिंग आउट में आठ मित्र देशों के 68 युवा सैन्य अधिकारियों में अफगानिस्तान से 40 , भूटान से 15 , तजाकिस्तान 05 , श्रीलंका 02, नेपाल 01, मालद्वीव 01 , म्यांमार 01, तंजानिया 01, वियतनाम 01 और तुर्किमेनिस्तान से 01 कैडेट पासिंग आउट का अंग बनें। 

इस बार पासआउट होने वाले कैडेटों के हिसाब से 45 कैडेट के साथ उत्तरप्रदेश टॉप पर रहा , उत्तराखंड 43 कैडट के साथ दूसरे स्थान पर , 34 जेंटलमैन कैडेट देने वाला हरियाणा तीसरे स्थान पर , चौथे स्थान पर 26 कैडेट के साथ बिहार और राजस्थान 23 कैडेट के साथ पांचवें स्थान पर रहा। वहीं अगर हम राज्यवार कैडेटों की संख्या पर नजर डालें तो उत्तरप्रदेश से 45 , उत्तराखंड- 43 , हरियाणा- 34 , बिहार- 26 , राजस्थान- 23 , पंजाब- 22 , मध्यप्रदेश- 20 , महाराष्ट्र- 20 , हिमाचल प्रदेश- 13 , जम्मूकश्मीर-11 ,दिल्ली-11 , तमिलनाडु -07 , कर्नाटक- 06 , केरल- 05 , आंध्रप्रदेश- 05 , चंडीगढ- 05 , झारखंड- 04 , पश्चिम बंगाल-03 , तेलंगाना- 03 , मणिपुर- 02 , गुजरात-02 , गोवा- 02 ,  उड़ीसा- 02 , आसाम -02 , मिजोरम- 02 , छत्तीसगढ़- 02 और  मिजोरम से 02 शामिल हैं। 



भारतीय सैन्य अकादमी की ऐतिहासिक चैटवुड बिल्डिंग के सामने ड्रिल स्क्वायर पर आयोजित पासिंग आउट परेड की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सलामी ली। इस परेड में इंडियन मिलिट्री बैंड देहरादून , बंगाल इंजीनियर बैंड और गढ़वाल राइफल सहित तीन बैंड शामिल थे। बैंड की धुन पर परेड मार्च शुरू हुई , जिसमें विजय भारत धुन ने वहां मौजूद लोगों को आकर्षित किया। इस दौरान सधे हुये कदम और शानदार ड्रिल के साथ जेंटलमैन कैडेट सेना के बैंड की धुन के साथ कदमताल करते हुये देश भक्ति गीतों पर देश पर मर-मिटने की शपथ लेकर आगे बढ़ रहे थे। इस दौरान राष्ट्रपति ने कैडेटों को ओवरआल बेस्ट परफॉर्मेंस और अन्य उत्कृष्ट सम्मान से नवाजा। जिसमें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर - एसीए अनमोल गुरुंग , ऑर्डर ऑफ मेरिट में स्वर्ण पदक- एसीए अनमोल गुरुंग , रजत पदक - बीओ तुषार सपरा , कांस्य पदक - बीसीए आयुष रंजन , चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ बैनर - केरेन कॉय , बांग्लादेश ट्रॉफी - बीओ सांगे फेनडेन दोरजी (भूटान) को मिला। आईएमए के ऐतिहासिक चेटवुड भवन के सामने ड्रिल स्क्वायर पर परेड के दौरान कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल हरिन्द्र सिंह और डिप्टी कमांडेंड आलोक जोशी ने परेड की सलामी ली। इससे बाद जनरल कमांडिंग ऑफिसर लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने परेड की सलामी ली। 

कोविड -19 संक्रमण को देखते हुये इस बार भी परेड के दौरान हर स्तर पर बेहद सतर्कता बरती गई। इस मौके पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ,आईएमए के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल हरिंदर सिंह , मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी , डिप्टी  कमांडेंट मेजर जनरल आलोक जोशी समेत कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी और कैडेट के स्वजनों सहित उत्तराखंड के डीजीपी अशोक कुमार भी अपने परिवार के साथ आईएमए पहुंचे थे। पासिंग आउट परेड के मद्देनजर अकादमी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई थी। चप्पे-चप्पे पर सेना के सशस्त्र जवान तैनात रहे , अकादमी परिसर के बाहरी क्षेत्र में सुरक्षा का जिम्मा दून पुलिस सम्हाली हुई थी। पासिंग आउट परेड के दौरान शनिवार सुबह छह बजे से दोपहर बारह बजे तक बजे तक पंडितवाड़ी से लेकर प्रेमनगर तक जीरो जोन रहा। इस दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-72 (चकराता रोड) से गुजरने वाला यातायात प्रेमनगर व बल्लूपुर से डायवर्ट रहा।


सैन्य अकादमी का इतिहास


भारतीय सैन्य अकादमी की स्थापना वर्ष 1932 में हुई थी। सैन्य अकादमी में वर्ष में दो बार यानि जून और दिसंबर में परेड आयोजित होती है। पायनियर नामक पहले बैच में 40 जेंटलमैन कैडेट्स शामिल थे। पहले बैच 1934 में पासआउट हुआ था , उसके बाद यह संस्थान लगातार जांबाज युवा अफसरों की फौज तैयार कर रहा है। वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक रहे फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ इसी पहले बैच के छात्र थे। पहले बैच में शामिल स्मिथ डन ने बर्मा और मुहम्मद मूसा खान ने पाकिस्तान की सेना का नेतृत्व किया। स्थापना से लेकर अब तक भारतीय सैन्य अकादमी देश और दुनियां की सेना को 63 हजार 668 युवा अफसर दे चुकी है , इनमें 33 मित्र देश के 2656 विदेशी कैडेट भी शामिल है। यह अकादमी अब तक देश और दुनियां को 62 हजार से ज्यादा सैन्य अफसर दे चुकी है। इसमें 2500 विदेशी सैन्य अफसर भी शामिल हैं।

 

सात राष्ट्रपति ले चुके सलामी 


भारतीय सैन्य अकादमी में अब तक सात राष्ट्रपति बतौर निरीक्षण अधिकारी पहुंचे हैं। वर्तमान राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से पहले छह और राष्ट्रपति इस पासिंग आउट परेड की सलामी ले चुके हैं। वर्ष 1956 में देश के पहले राष्ट्रपति डा. राजेंद्र प्रसाद शर्मा आईएमए पहुंचे थे। इसके अलावा वर्ष 1962 में डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन , वर्ष 1976 में फखरुद्दीन अली अहमद , वर्ष 1992 में आर वेंकटरमन , वर्ष 2006 में एपीजे अब्दुल कलाम और वर्ष 2011 में प्रतिभा देवी पाटिल ने परेड की सलामी ली थी।

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