Breaking

अपनी भाषा चुने

POPUP ADD

सी एन आई न्यूज़

सी एन आई न्यूज़ रिपोर्टर/ जिला ब्यूरो/ संवाददाता नियुक्ति कर रहा है - छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेशओडिशा, झारखण्ड, बिहार, महाराष्ट्राबंगाल, पंजाब, गुजरात, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटका, हिमाचल प्रदेश, वेस्ट बंगाल, एन सी आर दिल्ली, कोलकत्ता, राजस्थान, केरला, तमिलनाडु - इन राज्यों में - क्या आप सी एन आई न्यूज़ के साथ जुड़के कार्य करना चाहते होसी एन आई न्यूज़ (सेंट्रल न्यूज़ इंडिया) से जुड़ने के लिए हमसे संपर्क करे : हितेश मानिकपुरी - मो. नं. : 9516754504 ◘ मोहम्मद अज़हर हनफ़ी - मो. नं. : 7869203309 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ आशुतोष विश्वकर्मा - मो. नं. : 8839215630 ◘ सोना दीवान - मो. नं. : 9827138395 ◘ शिकायत के लिए क्लिक करें - Click here ◘ फेसबुक  : cninews ◘ रजिस्ट्रेशन नं. : • Reg. No.: EN-ANMA/CG391732EC • Reg. No.: CG14D0018162 

Friday, December 17, 2021

MP पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी रोक OBC आरक्षण बना वजह, री नोटिफाइड करने सर्वोच्च न्यायालय ने दिया आदेश।

 ब्रेकिंग न्यूज़ बड़ी खबर MP पंचायत चुनाव पर सुप्रीम कोर्ट ने लगा दी रोक

OBC आरक्षण बना वजह, री नोटिफाइड करने सर्वोच्च न्यायालय ने दिया आदेश।


सीएनआई न्यूज़ सिवनी मध्य प्रदेश से जिला ब्यूरो की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज पंचायत चुनाव को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई की और सुनवाई के बाद पंचायत चुनाव को स्टे कर दिया है.

 मध्य प्रदेश पंचायत चुनाव के लेकर सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने आज पंचायत चुनाव को लेकर दायर की गई याचिका पर सुनवाई की और सुनवाई के बाद पंचायत चुनाव को स्टे कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि ओबीसी सीटों को फिर से नोटिफाई किया जाए. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित सीटों पर चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाई है. जस्टिस एएम खानविलकर और सीटी रविकुमार की बेंच ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिए हैं कि सामान्य वर्ग की सीटों को फिर से रि-नोटिफाई कर उन्हें सामान्य वर्ग के लिए अधिसूचित किया जाए. लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने पाया कि ओबीसी आरक्षण का नोटिफिकेशन सर्वोच्च अदालत के पूर्व में दिए गए विकास किशनराव गवली वर्सेस महाराष्ट्र राज्य के फैसले के खिलाफ था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कानून का पालन नहीं होगा तो भविष्य में चुनाव रद्द भी किए जा सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट अब 27 जनवरी को इस मामले पर अगली सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे ही ओबीसी कोटा के चलते महाराष्ट्र के स्थानीय चुनाव में भी स्टे कर दिया गया था. याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा कोर्ट में पेश हुए. वहीं राज्य निर्वाचन आयोग का पक्ष एडवोकेट सिद्धार्थ सेठ और एडवोकेट कार्तिक सेठ ने रखा. 

विवेक तन्खा ने बताया कि कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को संविधान के हिसाब से चुनाव कराने का निर्देश दिया है. मध्य प्रदेश में आरक्षण रोटेशन प्रणाली का पालन नहीं किया गया है, जो कि संविधान की धारा 243 (C) का उल्लंघन है. 

'आग से मत खेलिए'

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि "कृप्या आग से मत खेलिए. आपको स्थिति को समझना चाहिए. राजनीतिक मजबूरियों के आधार पर फैसले मत कीजिए. क्या हर राज्य का अलग पैटर्न होगा? सिर्फ एक संविधान है और आपको उसका पालन करना होगा. सुप्रीम कोर्ट भी एक ही है. यह चुनाव आयोग का गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है. यह जिम्मेदारी से काम नहीं कर रहा है.जब ऐसा ही एक आदेश दिया गया था, तब आप भी वहां थे. हम नहीं चाहते कि मध्य प्रदेश में कोई प्रयोग हो. महाराष्ट्र केस के हिसाब से इसे देखा जाना चाहिए."

बता दें कि इससे पहले चुनाव में रोटेशन प्रणाली का पालन नहीं होने के चलते चुनाव पर रोक लगाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी. हालांकि हाईकोर्ट ने याचिका पर तुरंत सुनवाई से इंकार करते हुए 3 जनवरी को सुनवाई करने की बात कही. इस पर याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए शुक्रवार को सुनवाई तय की थी. 

No comments:

Post a Comment

Please do not enter any spam link in the comment box.

Hz Add

Post Top Ad