सुकमा से संजय सिंह भदौरिया
मो-9424222500
विधवा की तरह जी रही महिलाओं को देख दीपिका की भर आईं आंखे कहा शासन की हर योजना का मिले लाभ
धुरनक्सलगढ़ बुर्कापाल पहुंची दीपिका
परिवार के मुखिया के जेल जाने के बाद विधवा सी जिंदगी जी रही महिलाए
बच्चों का जीवन भी अनाथों के जैसा
कोरोना काल के शुरू होने के बाद आज तक नहीं देखा आपने जीवन साथी का चेहरा
सुकमा--24 अप्रेल2017 में बुर्कापाल में एक नक्सल अटैक हुआ जिसमें 74 वी बटालियन के 26 जवान शहीद हुए व 7 जवान घायल हुए इसके बाद इस इलाके से 117 लोगों पर नक्सल हमले के मामले पर कार्यवाही की गई जिसमें से बुर्कापाल के 39 लोगों पर इस नक्सल अटैक में शामिल होने का आरोप है
व वो इस वक्त जेल में हैं इस घटना के बाद मानो यहां की महिलाओ की जिंदगी में एक भूचाल सा आ गया हो इनकी बेबसी से भरी जिंदगी से रूबरू होने भाजयूमो प्रदेश उपाध्यक्ष अधिवक्ता दीपिका शोरी इनके गांव बुर्कापाल पहुंची दीपिका ने बताया कि जब उन्होंने इन महिलाओं से बात की तो इन महिलाओं ने बताया बुर्कापाल नक्सल अटैक के बाद सुरक्षा बल के जवानों का आरोप था कि उन्होंने ही माओवादियों को अपने घरों में पनाह दी थी.
परन्तु इन गाँव की महिलाएं इन आरोपों का खंडन करती हैं. उनका कहना है कि जब इन क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में जब हथियारबंद माओवादी किसी भी गाँव में घुसते थे तो गांव के लोग उनका विरोध भला कैसे कर सकते थे साथ ही दीपिका ने कहा कि जो आरोपी इस मामले में विचाराधीन हैं उनका फैसला तो न्यायपालिका करेगी ही पर इसमें इन महिलाओं का उनके बच्चों का उनके माता पिता का क्या दोष है
शासन की समस्त योजनाओं के हकदार हैं बुर्कापाल के रहवासी
दीपिका ने कहा कि शासन ने जितनी भी योजनाएं संचालित कर रखी हैं उन सभी योजनाओं को पाने के हकदार हैं बुर्कापाल के रहवासी परन्तु इन ग्रामीणों को शासन की महती योजनाओं की जानकारी ही नहीं है क्योंकि यहाँ पर सुरक्षा बलों के बड़े अधिकारियों के अलावा किसी भी अन्य अधिकारी का कभी प्रवास ही नहीं होता है
एक भी पीएम आवास नहीं बने बुर्कापाल में
दीपिका ने कहा कि बुर्कापाल में लगभग सभी ग्रामीण छोटी छोटी झोपड़ियों में रहने को मजबूर हैं न तन ढंकने को ज्यादा वस्त्र हैं न रहने को एक अच्छा मकान वो भी बिना घर के मुखिया के यहाँ की महिलाएं कितनी विषम परिस्थितियों में अपना जीवन यापन कर रही हैं यह एक विचारणीय प्रश्न है
जिस दिन बुर्कापाल जैसे गाँव की तश्वीर बदलेगी तो अवश्य सुकमा की तश्वीर बदलेगी
दीपिका ने कहा कि यह कहानी सिर्फ बुर्कापाल की ही नहीं है अपितु सुकमा जिले के सड़क से अंदर की ओर बसे गांव में जीवन यापन कर रहे हर परिवार की है जिस दिन बुर्कापाल जैसे गाँव की तश्वीर बदलेगी उस दिन किसी सफलता की कहानी गढ़ने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी अपने आप सुकमा की तश्वीर बदल जाएगी
बुर्कापाल के बच्चों को भी अधिकार है डीएवी व आत्मानंद जैसे संस्था में अध्ययन करने की
दीपिका ने कहा कि अधनंगे बदन इस गाँव मे रहने वाले हर बच्चे का अधिकार है कि वो भी जिले की आत्मानंद एवं डीएवी जैसी संस्था में अध्ययन कर इस अंधकार से निकल कर अपने भविष्य को उजाले की ओर ले जाएं जिसके लिए निश्चित तौर पर जिला प्रशासन को ध्यान रखना चाहिए
कभी नहीं आए भाजपा एवं कांग्रेस के बड़े लीडर पहली बार पहुंची है भाजपा नेत्री दीपिका
जब हमने यहाँ के रहवासियों से पूछा कि आज से पहले भाजपा एवं कांग्रेस के कोई बड़े लीडर यहाँ पहुंचे हैं तो उन्होंने कहा कि कोई भी हमारा दर्द देखने नहीं आता हमारी जिंदगी पिछले कई वर्षों से बुर्कापाल से न्यायालय व जेल परिसर के बीच ही घूम रही है आपको बता दें बुर्कापाल के रहवासी लोकतंत्र के सबसे महत्वपुर्ण त्योहार लोकसभा एवं विधानसभा निर्वाचन में हमेशा से ही भाग लेते रहे हैं परंतु उनकी यह भागीदारी सिर्फ अपना प्रतिनिधि चुनने तक ही सीमित रह गई है छत्तीसगढ़ के दोनों प्रमुख राजनीतिक दल भाजपा एवं कांग्रेस के कोई भी बड़े लीडर आज तक इनके बीच में नहीं पहुंचे हैं इनमें से बहुतों ने आज तक न अपने विधायक को देखा है न ही अपने वर्तमान सांसद को न ही पूर्व सांसद को पहली बार इनके बीच पहुंची हैं भाजयूमो प्रदेश उपाध्यक्ष दीपिकाशोरी
कोरोना काल के प्रारम्भ होने के बाद से नहीं मिली अपने जीवन साथी से सिर्फ एक ही आस है कब वापस आएंगे और जीवन पुनः खुशहाल होगा
बुर्कापाल की मड़कम देवे, मड़कम हूँगी,माड़वी मुके,सोढ़ी सुक्की,भीमे, वंजाम बुधरी, माड़वी विजया, माड़वी जिमे,पोडियाम कोशी,मुचाकी हिड़मे,मड़कम भीमे,सोढ़ी जोगी,मड़कम आयते,जोगी,नोप्पे मुये,कुंजाम नंगी,कोवासी जोगी,मड़कम देवो, माड़वी हिड़मे,माड़वी गंगी,माड़वी देवे ने बताया कि जबसे कोरोना काल प्रारंभ हुआ है तबसे आज तक किसी ने अपने जीवन साथी का किसी ने अपने पुत्र का किसी ने अपने भाई का चेहरा नहीं देखा है सिर्फ एक ही आस से अपनी जिंदगी जी रहे हैं कि कब वो घर वापस आएंगे और जीवन पुनः खुशहाल होगा।
मीलों तक न गाड़ियां और न ही कोई इंसान, रास्ते में फोर्स के अलावा इक्का दुक्का लोग दिख जाए तो बड़ी बात
दोरनापाल से बुर्कापाल के बीच करीब 40 किमी शासन के द्वारा सीसी सड़क का निर्माण पूरे जोर शोर से किया जा रहा है जो निर्माण के अंतिम पड़ाव में है। परन्तु पूरे सफर में इस बात की कोई गांरटी नहीं कि जो इस सड़क पर जा रहा है वो वापस आएगा या नहीं रास्ते में यदि फोर्स या एक दो वाहन की बात छोड़ दें तो बड़ी बड़ी पहाड़ियों के अलावा ऊंचे ऊंचे पेड़ों से भरे जंगल के अलावा कुछ भी नहीं सड़क पूरी तरह वीरान हो जाती है।एक रहस्यमय वातावरण के साथ सफर करना पड़ता है
मास्क व सेनेटाइजर देकर कोरोना से बचने की अपील
दीपिका ने कहा जब मै बुर्कापाल गाँव मे पहुंची तो वहां देखा कि किसी ने भी मास्क नहीं लगाया था तो सर्वप्रथम मैंने उनसे प्रश्न किया की वैक्सीन किसने किसने लगाया है तो पता चला कि लगभग सभी लोगों ने वेक्सिननेशन करवाया है परन्तु मास्क का इस्तेमाल नहीं करते इस पर मैनें उन्हें समझाइस देते हुए मास्क एवं सेनेटाइजर का वितरण किया साथ ही कोविड 19 से सुरक्षा ही बचाव है के सम्बंध में जानकारी दी

















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