रतनपुर मेले में रही आज भारी भीड़ जमकर हुई खरीदारी
रतनपुर से ताहिर अली की रिपोट
रतनपुर .....माघी पूर्णिमा मेला 16 फरवरी से प्रारंभ हो गया है जिसका आज पहला रविवार और मेले का पांचवा दिन था आज रविवार छुट्टी का दिन होने की वजह से मेला खचाखच भरा रहा ,मेला में लगाने वाले सभी दुकानदारों ने अच्छा खासा व्यापार किया है और वही मेला में आए लोगों ने भी मेले में आए हुए झूले का खूब आनंद लिया जिसमें डिस्को झूला, ब्रेक झूला, बच्चों के अनेकों प्रकार के झूले , सर्कस, मौत कुआं, मीना बाजार यह सभी मेले में आकर्षण का केंद्र हैं
आज भारी भीड़ को देखते हुए रतनपुर पुलिस भी मेले में व्यवस्था बनाने के लिए मुस्तैद नजर आई रतनपुर क्षेत्र के आसपास के ग्रामीण इस मेले में आकर सामानों की खरीदी करते दिखे इसमें लकड़ी के खिलौने, साल ओखरा, बर्तन ,कपड़ा ,जूता चप्पल अनेक प्रकार के प्लास्टिक के खिलौने एवं ज्वेलरी समान
मिठाइयों की दुकानें मैं जलेबी ,मसूर पाक, रसगुल्ले आदि की खरीदी करते हुए दिखे विदित हो कि यह मेला पारंपरिक और पौराणिक मेला है
जोकि आठाबिसा तालाब के तट पर लगा हुआ है जहां पर सतीचौरा विद्यमान है यहां राजा की रानिया सती हुई थी उन्हीं की याद में यह मेला आयोजित होता है यह मेला आदि काल से चला आ रहा है जो आज भी अनवरत हर वर्ष लगाए जा रहे हैं समय के साथ इस मेला का स्वरूप भी बदलते गया कभी इस मेले में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग बैलगाड़ी में आया करते थे और यही पर एक सप्ताह रुक कर खाना पीना यही पका कर खाते थे लेकिन समय बदलता गया और यह मेला आदिवासी विकास मेला के रूप में जाना गया यहां प्रदर्शनी में शासन की योजनाओं का प्रदर्शन किया जाता था जिसकी जानकारियां मेले के माध्यम से लोगों को मिलती थी रात्रि कालीन छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम होता था लेकिन इस बार नगरी प्रशासन की उदासीनता और निष्क्रिय जनप्रतिनिधियों की वजह से क्या यह मेला दिन-ब-दिन अपना अस्तित्व खोते जा रहा है महज एक पारंपरिक मेला के रूप में इस बार लोगों को देखने को मिल रहा है

















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